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गांदरबल और बडगाम में चार युवाओं को आतंक की राह पर जाने से रोका

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श्रीनगर। मध्य कश्मीर के गांदरबल और बडगाम जिले में जम्मू-कश्मीर पुलिस ने चार युवाओं को आतंकवाद की राह पर जाने से रोक लिया। इनमें से दो युवा 18 वर्ष के हैं। चारों पाकिस्तान में बैठे आतंकी आकाओं के संपर्क में थे। पुलिस ने इनकी लोकेशन ट्रेस कर इन्हें श्रीनगर और त्राल इलाके से पकड़ा। दो युवाओं को काउंसलिंग के बाद परिवार के हवाले कर दिया गया, जबकि दो अन्य की काउंसलिंग की जानी बाकी है। गांदरबल के एसएसपी ने अभिभावकों को बच्चों पर ध्यान देने को कहा, ताकि वे गुमराह न हो पाएं।
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गांदरबल के एसएसपी खलील पोसवाल ने बताया कि वह सोशल मीडिया मोनिटरिंग के जरिये एक मॉड्यूल पर काम कर रहे थे। इस दौरान पता चला कि जिले के बटवीना और कुरहामा के रहने वाले दो युवक पाकिस्तान में बैठे आतंकी आकाओं के संपर्क में हैं। उन्हें आतंकवाद में शामिल होने के लिए गुमराह किया जा रहा है। एसएसपी ने बताया कि इसके बाद दोनों युवा दक्षिणी कश्मीर के शोपियां के लिए रवाना हुए। इसकी खबर मिलते ही उन्होंने शोपियां पुलिस के साथ उनकी लोकेशन ट्रेस की। दोनों युवाओं को जब इसकी भनक लगी तो वे वापस श्रीनगर की ओर भाग निकले और श्रीनगर पुलिस की मदद से दोनों को पकड़ लिया गया।
वहीं बडगाम पुलिस ने भी दो युवाओं को आतंकवाद में शामिल होने से रोक लिया। पुलिस के अनुसार 14 मार्च को बडगाम जिले से उन्हें ऐसे दो परिवारों ने सूचना दी कि उनके जवान बेटे घर से लापता हो गए हैं। इसके बाद पुलिस ने एक विशेष टीम का गठन कर युवाओं की तलाश तेज की। आखिरकार इन युवाओं को दक्षिणी कश्मीर के पुलवामा जिले में अवंतीपोरा पुलिस ने त्राल इलाके से पकड़ लिया। पुलिस के अनुसार ये युवा भी सोशल मीडिया के जरिये पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स के संपर्क में थे। इन्हें भी आतंकवाद में शामिल होने के लिए गुमराह किया जा रहा था। दोनों को काउंसलिंग के बाद अभिभावकों के हवाले कर दिया गया।
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सोशल मीडिया के जरिये हुए गुमराह
एसएसपी गांदरबल के अनुसार समय रहते दोनों युवाओं को आतंकवाद के चंगुल में शामिल होने से बचा लिया गया क्योंकि अगर एक बार वे सक्रिय होकर गतिविधि को अंजाम दे देते तो वापस आना मुश्किल था। अब पुलिस दोनों युवाओं की काउंसलिंग करेगी। जानने की कोशिश की जाएगी कि आखिर यह आतंकवाद में शामिल क्यों होना चाहते थे। पोसवाल के अनुसार इनके परिवारवालों ने इन पर शुरू में ध्यान नहीं दिया और वे सोशल मीडिया के दुरुपयोग के चलते आतंकवाद में शामिल होने के लिए गुमराह हो गए।
इस वर्ष 30 से अधिक युवा मुख्यधारा में लौटे
बता दें, घाटी में सेना द्वारा ऑपरेशन ‘मां’ और सीआरपीएफ की तरफ से ‘मददगार’ चलाया जा रहा है। साथ ही जम्मू-कश्मीर पुलिस भी युवाओं को गुमराह होने से रोकने के प्रयास कर रही है। इन प्रयासों से आतंकवाद की राह से वापस आने वाले युवाओं की सख्य बढ़ रही है। हालांकि सुरक्षा कारणों के चलते ऐसे युवाओं का नाम पता गोपनीय रखा जाता है। एक आंकड़े के मुताबिक वर्ष 2020 में मुख्यधारा से जुड़ने वाले युवाओं की संख्या 150 से अधिक थी जबकि इस वर्ष अभी तक 30 से अधिक युवाओं को आतंकवाद की राह पर जाने से रोका गया है।
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