- कक्षा नौवीं के छात्र सईद दानियाल ने बनाया रोबोट कृषि मेले में छाया, मुख्यमंत्री ने भी की तारीफ
अजीम यूसुफ
श्रीनगर। स्कॉस्ट में शनिवार से लगे कृषि मेले में एक किशोर वैज्ञानिक ने दिखाया कि कैसे रिमोट से चलने वाला रोबोट जमीन की खुदाई कर, बीज बो कर जमीन समतल कर देता है और जरूरत होने पर खुद ही सिंचाई भी कर देता है। वहीं ड्रोन के स्टॉल में बताया गया कि कैसे ड्रोन से कीटनाशक छिड़काव और जीपीएस आधारित मानिटरिंग की जा सकती है।
शेर-ए-कश्मीर यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी ऑफ कश्मीर में लगे गोंगुल 2026 एग्रीटेक मेले में भविष्य की खेती की तकनीकों का प्रदर्शन किया जा रहा है। ऐसा ही एक स्टॉल है फार्म फॉर फ्यूचर, जहां डॉ. शौकत रसूल कृषि तकनीक और ड्रोन की उपयोगिता बता रहे हैं। इसी स्टॉल में रखा है डीपीएस के कक्षा नौवीं के छात्र सईद दानियाल का रिमोट से चलने वाला रोबोट।
स्टॉल का निरीक्षण करने आए मुख्यमंत्री ने इसे देखा तो काफी सराहा और भविष्य के लिए शुभकामनाएं भी दीं। दानियाल ने मुख्यमंत्री को रोबोट को चलाकर दिखाया कि कैसे यह जमीन खोदकर बीज बो देता है और उसके बाद जमीन समतल भी कर देता है। नम जमीन और सूखी जमीन पर प्रयोग कर दिखाया कि सूखी जमीन पहचान कर यह खुद सिंचाई भी कर देता है।
इस परीक्षण के बाद उन्होंने अमर उजाला को बताया कि एक साल पहले जापानी रोबोट्स को देखते हुए उन्हें इसका विचार आया। उन्होंने स्कॉस्ट के वैज्ञानिक डॉ. शौकत रसूल से मदद मांगी। स्कॉस्ट की मदद से उन्होंने एक साल में यह रोबोट बनाया है। इस रोबोट से किसानों की काफी मदद हो सकती है। शनिवार को पहले दिन दानियाल के इस रोबोट की काफी चर्चा रही।
जीपीएस एआई ड्रोन और वीआर से दिखाई भविष्य की खेती की झलक
डॉ. शौकत रसूल का स्टॉल फार्म फॉर फ्यूचर में भविष्य की खेती की झलक दिखाई जा रही है। जीपीएस एआई ड्रोन, डिजिटल प्रिंटर्स और वीआर (वर्चुअल रियैलिटी) की मदद से खेती को आसान बनाने के तरीके बताए जा रहे हैं। डॉ. शौकत ने बताया कि आधुनिक तकनीक से हम किसानों के लिए खेती को बहुत आसान बना सकते हैं। जीपीएस ड्रोन से खेत की मैपिंग, एआई सेंसर से फसल में पानी और कीटनाशकाें की जरूरत का पता लगा सकते हैं। रिमोट ऑपरेटेड एआई ड्रोन से सिंचाई और दवाओं का छिड़काव कर सकते हैं। इस दौरान उन्होंने सिंचाई मशीन का भी प्रदर्शन किया। यहीं स्टॉल में रोबोटिक आर्म और वीआर ट्यूटोरियल के जरिए कृषि कार्य का अभ्यास भी कराया जा रहा था।