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Srinagar News: कश्मीरी फोटो जर्नलिस्ट यासिर इकबाल ने वर्ल्ड प्रेस फोटो अवाॅर्ड जीता

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कश्मीरी फोटो जर्नलिस्ट यासिर इकबाल। संवाद
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अमर उजाला ब्यूरो
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श्रीनगर। कश्मीरी फोटो जर्नलिस्ट यासिर इकबाल ने पश्चिम, मध्य और दक्षिण एशिया सिंगल्स कैटेगरी में प्रतिष्ठित वर्ल्ड प्रेस फोटो कॉन्टेस्ट 2026 जीता है। उन्होंने यह अवाॅर्ड जम्मू-कश्मीर के संघर्ष-ग्रस्त इलाके में दुख को दर्शाने वाली अपनी एक दमदार तस्वीर के लिए जीता है।
इस अवार्ड-विजेता तस्वीर का शीर्षक है 'कश्मीर में एक बेटी का दुख''''। इसमें 21 साल की सनम बशीर को अपनी मां के अंतिम संस्कार के दौरान दुख से टूटकर गिरते हुए दिखाया गया है। उनकी मां, नरगिस बेगम (45) की मौत छर्रे लगने से हुई थी। यह घटना तब हुई जब 9 मई, 2025 को वे अपने घर से भाग रहे थे और उन पर एक मोर्टार शेल आकर गिरा।
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यह तस्वीर एक मैगजीन के 21 मई, 2025 के अंक के कवर पर छपी थी जिसका शीर्षक था ''''क्या यह युद्ध है?''''। इस तस्वीर ने भारत और पाकिस्तान के बीच हुए तीखे टकराव के दौरान मानवीय नुकसान को बखूबी दिखाया।
एक्स पर एक पोस्ट में मैगजीन ने इकबाल को इस उपलब्धि पर बधाई दी। उन्होंने बताया कि इस अंक में दोनों परमाणु-सशस्त्र पड़ोसी देशों के बीच चार दिनों तक चले तनावपूर्ण गतिरोध का विश्लेषण किया गया था जिसने उन्हें खुले युद्ध के कगार पर ला खड़ा किया था। यह तनाव तब शुरू हुआ जब पहलगाम में 26 पर्यटकों की हत्या के बाद भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर में आतंकी ठिकानों पर हमले किए।



इस स्थिति के दौरान चार दिनों तक हवाई हमले, ड्रोन हमले और सीमा पार से गोलीबारी होती रही जिसमें दर्जनों लोग मारे गए। इसके बाद दोनों पक्ष पूर्ण और तत्काल युद्धविराम पर सहमत हुए।
वर्ल्ड प्रेस फोटो की जूरी ने इकबाल की तस्वीर को उसकी भावनात्मक गहराई और कहानी कहने के अंदाज के लिए सराहा। इस तस्वीर ने भू-राजनीतिक तनावों के पीछे छिपे मानवीय कष्टों की ओर दुनिया का ध्यान खींचा है।
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गौरतलब है कि यासिर ने अपनी इस उपलब्धि को लेकर कहा, ''''अल्हम्दुलिल्लाह। सारा शुक्र उस अल्लाह का है जिसने मेरे नसीब में यह पुरस्कार जीतना लिखा। 2026 के वर्ल्ड प्रेस फोटो कॉन्टेस्ट के विजेताओं में से एक बनकर मैं खुद को अत्यंत सम्मानित महसूस कर रहा हूँ। मैं अपने संगठन और अपने संपादक का इस अवसर के लिए और मुझ पर विश्वास रखने के लिए धन्यवाद देना चाहूंगा।''''
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