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श्रीनगर: खुतबों के विषय तय करने के प्रस्ताव पर घमासान, विरोध पर वक्फ बोर्ड का यू-टर्न; अंद्राबी ने दी सफाई

Wed, 14 Oct 2026 01:24 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर

सार

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती समेत कश्मीर केंद्रित सभी पार्टियां इस पहल के विरोध में खड़ी हो गईं।
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दरख्शां अंद्राबी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जम्मू-कश्मीर वक्फ बोर्ड से जुड़ी मस्जिदों और अन्य धार्मिक स्थलों में जुमे की नमाज के दौरान दिए जाने वाले के खुतबों (उपदेशों) के साझा विषय तय करने और इनमें समन्वय का प्रस्ताव विवादों में घिर गया है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती समेत कश्मीर केंद्रित सभी पार्टियां इस पहल के विरोध में खड़ी हो गईं।

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मुत्ताहिदा मजलिस-ए-उलेमा (एमएमयू) भी सामने आ गई और इसे धार्मिक मामलों में दखल करार दिया। विवाद बढ़ा तो बोर्ड की चेयरपर्सन डॉ. दरख्शां अंद्राबी ने यू-टर्न लिया और स्पष्ट किया कि ऐसा कोई बाध्यकारी आदेश जारी नहीं किया गया है। इमाम व खतीब अपने उपदेशों यानी खुतबे के विषय चुनने के लिए स्वतंत्र हैं।

वक्फ बोर्ड से जुड़े इस्लामिक विद्वानों और उपदेशकों की शनिवार को बैठक हुई थी। इसमें नशा, महिलाओं व युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य समेत कई सामाजिक मुद्दों पर खुतबे का फैसला लिया गया था। इसके बाद अंद्राबी ने खुतबे के साझा विषय तय करने के लिए मुफ्तियों, इमामों और खतीबों की कोर कमेटी गठित करने की घोषणा की थी। धार्मिक एवं राजनीतिक संगठनों ने फैसले को मस्जिदों के मिंबर पर सरकारी नियंत्रण की कोशिश बताया। एमएमयू ने कहा, जम्मू-कश्मीर के मुसलमान इसे कभी स्वीकार नहीं करेंगे।
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विवाद बढ़ने पर बोर्ड की चेयरपर्सन को सफाई देनी पड़ी और कहा कि हाल ही में आयोजित एक मजलिस में इमामों और खतीबों ने सामाजिक कुरीतियों से निपटने के लिए साझा विषयों पर उपदेश देने की इच्छा जताई थी। बोर्ड ने इसी विचार को आगे बढ़ाने पर विचार किया था।

अंद्राबी ने कहा कि नमाज के अलावा सही रास्ता दिखाना भी इस्लामिक विद्वानों (उलेमा) और धार्मिक मार्गदर्शकों का कर्तव्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह एक सामूहिक फैसला था और इसमें कोई छिपा हुआ एजेंडा या आधिकारिक सरकारी आदेश नहीं है। उन्होंने कहा कि अधिकांश मस्जिदें और दरगाहें वक्फ बोर्ड के अधिकार क्षेत्र में आती हैं और शिक्षित व जागरूक इमाम इससे जुड़े हैं।

वक्फ बोर्ड के दायरे में प्रदेश में बड़ी धार्मिक विरासत...
प्रदेश में वक्फ बोर्ड के दायरे में घाटी और जम्मू संभाग की बड़ी धार्मिक विरासत आती है। आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में वक्फ के तहत 5,009 मस्जिदें, 990 दरगाह, मजार व तीर्थस्थल, 790 खानकाहें और 15,592 कब्रिस्तान हैं।

किसने क्या कहा...
यह मुसलमानों के धार्मिक मामलों में भाजपा की ओर से हस्तक्षेप का एक अस्वीकार्य प्रयास है और इसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भाजपा द्वारा नियुक्त चेयरपर्सन को अपने आकाओं को खुश करने की यह अनुचित कोशिश तुरंत रोकनी चाहिए। 
-उमर अब्दुल्ला, मुख्यमंत्री

जम्मू-कश्मीर को भाजपा के लिए प्रयोगशाला बना दिया गया है। ये आदेश एक परीक्षण के तौर पर हो रहा है। यह हमारे धर्म और आस्था में दखलंदाजी है। यूसीसी की तरह वे यहां भी एकरूपता लाना चाहते हैं। 
-महबूबा मुफ्ती, पीडीपी अध्यक्ष

यह सुझाव हास्यास्पद है कि कोई वैधानिक संस्था यह तय या नियंत्रित करेगी कि मिंबर से क्या उपदेश दिया जाए। जम्मू-कश्मीर के मुसलमान इसे कभी स्वीकार नहीं करेंगे। सरकार या प्रशासन धार्मिक मामलों, आस्था या पहले से लिखे गए भाषणों को तय करने का अधिकार अपने हाथ में नहीं ले सकता। एमएमयू ने कहा कि यह धार्मिक क्षेत्र में राज्य की जबरन घुसपैठ है, जो कानून और धार्मिक स्वतंत्रता के सिद्धांतों के विरुद्ध है। 
-एमएमयू

कोई आदेश नहीं दिया... राजनीति हो रही : अंद्राबी
बोर्ड ने कोई आदेश जारी नहीं किया है। ये सभी की सामूहिक चिंता थी। यह हमारे द्वारा थोपा गया कोई एकतरफा फैसला नहीं था। धार्मिक विद्वान व खतीब अपने उपदेशों के विषय स्वयं तय कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित कोर कमेटी में केवल इस्लामिक विद्वानों को शामिल किया जाना था और वह स्वयं इसका हिस्सा नहीं थीं। पहल का उद्देश्य नशाखोरी और युवाओं से जुड़ी सामाजिक समस्याओं के प्रति जागरूकता फैलाना था।
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