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सभी विभागों में एमटीएस कैडर एकसमान होना अनिवार्य : कैट

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केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण ने सुनाया फैसला, कहा-पुरानी या अप्रचलित श्रेणियों को जारी रखने का कोई अर्थ नहीं
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अदालत से ... का लोगो लगाएं
संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) ने सभी सरकारी विभागों को निर्देश दिया है कि वे अपने पूर्ववर्ती क्लास-4 कर्मचारियों के पुनर्गठन के तहत सभी को एकसमान मल्टी-टास्किंग स्टाफ (एमटीएस) के पदनाम से नामित करें। अदालत ने पुराने व अप्रचलित पदनाम जारी रखने को निरर्थक बताते हुए भेड़ पालन विभाग की वरिष्ठता सूचियां रद्द की हैं।
न्यायमूर्ति रितु टैगोर (न्यायिक सदस्य) और प्रशासनिक सदस्य प्रशांत कुमार की पीठ ने यह टिप्पणी भेड़ पालन विभाग के बडगाम, बारामुला और बांदीपोरा जिलों की एमटीएस कर्मचारियों की अंतिम वरिष्ठता सूचियों को रद्द करते हुए की। पीठ ने पिछले साल 15 मई के एक आदेश सहित सभी अस्थायी व अंतिम वरिष्ठता सूचियों और जिला स्तरीय विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) के गठन से जुड़े सभी परिपत्रों को भी रद्द कर दिया।
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पीठ ने पिछले वर्ष 15 मई के अस्वीकृति आदेश के साथ-साथ अस्थायी एवं अंतिम वरिष्ठता सूचियों तथा जिला स्तर पर विभागीय पदोन्नति समितियों (डीपीसी) के गठन का मार्ग प्रशस्त करने वाले सभी संबंधित परिपत्रों को रद्द कर दिया। अधिकरण ने देखा कि वर्ष 2022 के एस.ओ. 133 के बावजूद जिसमें सभी क्लास-आईवी पदों को मल्टी-टास्किंग स्टाफ (एमटीएस) के रूप में पुनः नामित किया गया था, विभाग ने वरिष्ठता निर्धारण करते समय असिस्टेंट स्टॉकमैन, चौकीदार और फील्डमैन जैसे अप्रचलित पदनामों को जारी रखा।
अधिकरण ने पाया कि वर्ष 2022 के एसओ 133 के बावजूद जिसके तहत सभी क्लास-4 पदों को एमटीएस के रूप में पुनः नामित किया गया था। विभाग ने वरिष्ठता तय करते समय ''असिस्टेंट स्टॉकमैन'', ''चौकीदार'' और ''फील्डमैन'' जैसे अप्रचलित पदनामों का इस्तेमाल जारी रखा। अधिकरण ने कहा कि इससे पुनर्गठन का मूल उद्देश्य, यानी समान स्तर के कर्मचारियों के बीच के कृत्रिम भेदभाव को खत्म करना, विफल हो जाता है।
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पीठ ने विभाग के आदेश को अस्पष्ट और अतार्किक करार दिया और माना कि विभाग ने कर्मचारियों की आपत्तियों का समुचित निवारण नहीं किया, न ही अधिकरण के पहले के निर्देशों का पालन किया। अधिकरण ने यह भी उल्लेख किया कि समान मामलों में कैट की जम्मू पीठ पहले ही राहत प्रदान कर चुकी है और समान स्थिति में भिन्न व्यवहार करना भेदभावपूर्ण होगा।
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