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Srinagar News: सुमैया ने रूढ़िवादी सोच को हराकर कश्मीर की लड़कियों को दिखाई नई राह

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सुमैया रसूल। संवाद
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-अपने सपनों को दी उड़ान, घूमने का शौक ट्रैवल एजेंसी के स्टार्ट-अप में बदला
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-बोलीं-लोग क्या कहेंगे इसकी चिंता न करें, लक्ष्य पर ध्यान दें, सफलता जरूर मिलेगी
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अमृतपाल सिंह बाली
श्रीनगर। श्रीनगर के बागात बरजुला की रहने वाली सुमैया रसूल ने रूढ़िवादी सोच को पराजित कर लड़कियों को नई राह दिखाई है। पढ़ाई के साथ-साथ सपनों को उड़ान देते हुए अपना स्टार्ट-अप शुरू किया है।
सुमैया का मानना है, '' आज के दौर में लड़कियों को इसकी परवाह नहीं करनी चाहिए कि लोग क्या कहेंगे। अपने लक्ष्य की ओर ध्यान केंद्रित करना चाहिए तभी वो सफल हो पाएंगी।'' सुमैया आज न केवल कश्मीर की लड़कियों के लिए प्रेरणास्रोत हैं बल्कि वह कई अन्य लोगों को भी रोजगार मुहैया करा रही हैं। अमर उजाला से विशेष बातचीत में सुमैया ने कहा,
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मुझे घूमने का काफी शौक था। मैंने इस शौक को अपने स्टार्ट-अप में बदल लिया। पहले एक टिकटिंग कंपनी और फिर बाद में एक ट्रैवल एजेंसी में काम किया। इसके बाद सितंबर 2024 में अपनी ट्रैवल कंपनी खोल ली। फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा।

एक महीने में करीब 2-3 लाख का टर्नओवर
सुमैया ने बताया कि वह एक महीने में अच्छा खासा कमा लेती हैं। उनकी बदौलत अन्य लोगों को भी रोजगार मिल पाता है। उन्हें अपने आप पर गर्व है। एक महीने में करीब 2-3 लाख का टर्नओवर रहता है। पहलगाम हमले के बाद काम कम हुआ था लेकिन अब बर्फबारी के बाद फिर से टूरिज्म सीजन ने रफ्तार पकड़ी है। मेरे साथ दो और लोग हैं जो मेरी कंपनी में काम करते हैं। होटल वालों और अन्य हितधारकों को भी मुझसे बिजनेस मिलता है। सुमैया ने कहा कि मेरा सपना है कि मैं पर्यटकों को कश्मीर का हर वो कोना दिखाऊं जहां कोई नहीं गया। उसके लिए पहले मैं ऐसी जगहों को एक्सप्लोर करती हूं ताकि पर्यटकों को अच्छे से घुमा सकूं।

आज जिस मुकाम पर हूं, मेरी मां को श्रेय जाता है
उन्होंने बताया कि कश्मीर में एक रूढ़िवादी समाज है जो लड़कियों और महिलाओं को घरों से बाहर देख कर खुश नहीं होता। सुमैया ने कहा, मेरे पिता ने भी मुझे बिल्कुल भी सहयोग नहीं किया। वो तो 10वीं के बाद पढ़ाना भी नहीं चाहते थे लेकिन मेरी मां ने हमेशा मेरा साथ दिया। परिवार में मेरी मां का बहुत अच्छा सहयोग और समर्थन मिला। मेरे सपनों को पंख देने के लिए मेरी मां ने बहुत कुर्बानियां दी। छोटी-छोटी नौकरियां कर उन्होंने मुझे और मेरे छोटे भाई को पढ़ाया। मैं आज जिस मुकाम पर हूं उसका श्रेय मेरी मां को जाता है।

आगे आएं, ये मत सोचें कि आप किसी से कम हैं
एक सवाल के जवाब में सुमैया ने कहा कि मैं कई लोगों की आलोचना का सामना करती आ रही हूं और आज भी कर रही हूं। काफी लोग सोशल मीडिया पर ट्रोल करते हैं लेकिन मैं इन बातों को दिल पर नहीं लेती। इन्हें नजरअंदाज कर अपने लक्ष्य की ओर ध्यान देती हूं। लड़कियां बहुत कुछ करना चाहती हैंं लेकिन समाज की ऐसी हरकतों से डरती हैं। मैं उन्हें यह संदेश देना चाहती हूं कि अपने सपनों को न दबाएं ताकि बाद में उन्हें पछतावा न हो कि हमने ऐसा नहीं किया। मैं जब लड़की होने के नाते यह सब कर सकती हूं तो मैं बाकियों से भी कहना चाहती हूं कि आप भी आगे आइए। यह मत सोचिए कि आप किसी से कम हैं।
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खुद जाकर अपने मेहमानों का स्वागत करती हूं
उन्होंने कहा, कश्मीर घूमने आए पर्यटकों के मन में कश्मीर को लेकर कहीं न कहीं डर सा रहता है। पर्यटक सुरक्षित महसूस कर सकें इसका मैं पूरा ध्यान रखती हूं। उन्हें सुरक्षा का एहसास दिलाने के लिए मैं खुद एयरपोर्ट पर जाकर उनका स्वागत करती हूं। कई बार तो होटल जहां वो ठहरे होते हैं वहां चली जाती हूं। इससे एक तो सकारात्मक संदेश जाता है और दूसरा उन्हें यह पता चल पाता है कि आखिर उनके टूर का ऑर्गेनाइजर कौन है। मेरा एक सोशल मीडिया पर पेज भी है। मैं उस पर फोटो और वीडियो अपलोड करती हूं ताकि बाहर एक संदेश जा सके कि कश्मीर सुरक्षित स्थान है।
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