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Srinagar News: शोपियां में छात्रों और अभिभावकों का प्रदर्शन, जामिया सिराज-उल-उलूम को फिर से खोलने की मांग

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शोपियां में जामिया सिराजुल उलूम के बच्चों और अभिभावकों ने किया प्रदर्शन। संवाद - फोटो : Archive
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- यूएपीए के तहत गैर-कानूनी संस्था घोषित किया गया था, अधिसूचना को वापस लेने की मांग
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- छात्रों ने अभिभावकों के साथ संस्थान से लेकर जिला मजिस्ट्रेट के दफ्तर तक निकाला मार्च


संवाद न्यूज एजेंसी
शोपियां। जिले में एक शिक्षण संस्थान के छात्रों और शिक्षकों ने वीरवार को सरकार के उस फैसले के खिलाफ मार्च निकाला जिसमें संस्थान को यूएपीए के तहत एक गैर-कानूनी संस्था घोषित किया गया था। इस दौरान छात्रों के अभिभावक भी शामिल हुए।
अधिकारियों ने बताया कि दक्षिण कश्मीर के शोपियां जिले में स्थित दारुल उलूम जामिया सिराज-उल-उलूम के छात्रों और अभिभावकों सहित शिक्षकों ने संस्थान से लेकर जिला मजिस्ट्रेट के दफ्तर तक मार्च निकाला।
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उन्होंने बताया कि छात्रों के हाथों में तख्तियां थीं जिन पर ''हमारा भविष्य बचाओ'' और ''हमारा स्कूल खोलो'' जैसे नारे लिखे थे। साथ ही वे शिक्षा हमारा मौलिक अधिकार है के नारे भी लगा रहे थे। विरोध प्रदर्शन में हिस्सा ले रहे 11वीं कक्षा के एक छात्र ने कहा कि हम अपने स्कूल को फिर से खोलने की मांग कर रहे हैं। हम शांति में विश्वास रखते हैं और चाहते हैं कि हमारी पढ़ाई जारी रहे। अधिकारियों ने बताया कि जिला मजिस्ट्रेट के दफ्तर तक निकाला गया यह मार्च शांतिपूर्ण रहा। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मांग की कि वे संस्थान को गैर-कानूनी संस्था घोषित करने वाले नोटिफिकेशन को वापस ले।
पिछले महीने मंडलायुक्त (डिवकॉम) अंशुल गर्ग ने शोपियां के एसएसपी की ओर से पेश किए गए डोजियर के आधार पर दो पन्नों का एक आदेश जारी किया था। इसमें इमाम साहिब इलाके में स्थित दारुल उलूम जामिया सिराज-उल-उलूम में कथित तौर पर चल रही गैरकानूनी गतिविधियों की ओर इशारा किया गया था। 24 अप्रैल को गर्ग द्वारा जारी आदेश के अनुसार रिकॉर्ड पर ऐसे विश्वसनीय इनपुट और सबूत मौजूद थे जो इस बात की ओर इशारा करते हैं कि इस संस्थान के जमात-ए-इस्लामी के साथ लगातार और गुपचुप संबंध रहे हैं।बता दें कि भारत सरकार ने 2019 में जमात-ए-इस्लामी पर प्रतिबंध लगा दिया था।
इस बीच शोपियां के विधायक शब्बीर अहमद कुल्ले ने कहा कि इस मुद्दे को सुधारों व बातचीत के जरिए हल किया जाना चाहिए। सुनिश्चित किया जाए कि छात्रों की पढ़ाई पर असर न पड़े। उन्होंने कहा, हमने पहले भी इसकी निंदा की थी और आज फिर करते हैं। ऐसी चीजें नहीं होनी चाहिए। साथ ही कहा कि पिछले कुछ सालों में इस संस्थान के कामकाज को लेकर सरकार की तरफ से कुछ चिंताएं जताई गई थीं। एक-दो सालों में राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों या चरमपंथी सोच से जुड़ी कुछ रिपोर्टें सामने आई थीं। कथित तौर पर संस्थान को इन चिंताओं को दूर करने की सलाह भी दी गई थी।
विधायक कुल्ले ने बताया कि उन्होंने अधिकारियों से बात की है। शिक्षा विभाग तथा सरकारी एजेंसियों के साथ इस मामले पर चर्चा करने के लिए कुछ समय मांगा है ताकि कोई ऐसा हल निकाला जा सके जिससे छात्र अपनी पढ़ाई फिर से शुरू कर सकें। हमें भरोसा दिलाया गया है कि एक बार जब ये मुद्दे हल हो जाएंगे तो छात्रों को अपनी पढ़ाई जारी रखने की अनुमति दे दी जाएगी।
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आधुनिक शिक्षा केंद्र में बदला जाना चाहिए संस्थान
विधायक ने आगे कहा कि इस संस्थान को एक आधुनिक शिक्षा केंद्र में बदला जाना चाहिए जिसका मुख्य जोर विज्ञान और समकालीन शिक्षा पर हो। हम चाहते हैं कि छात्र विज्ञान और आधुनिक शिक्षा उसी तरह हासिल करें जिस तरह अन्य जाने-माने स्कूलों जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में छात्र पढ़ाई करते हैं। कुल्ले ने कहा कि सरकार के साथ बातचीत जारी रहेगी। इस मामले को उपराज्यपाल के क्षेत्र के दौरे समय उनके सामने भी उठाया जाएगा।
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