- एलजी कार्यालय को सौंपी शिकायत के बाद जम्मू-कश्मीर सरकार के आवास और शहरी विकास विभाग ने लिया फैसला
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर सरकार के आवास और शहरी विकास विभाग ने श्रीनगर नगर निगम (एसएमसी) के वित्तीय सलाहकार और मुख्य लेखा अधिकारी के कार्यालय में भ्रष्टाचार और प्रक्रियात्मक चूक के गंभीर आरोपों की व्यापक फैक्ट-फाइंडिंग जांच के आदेश जारी किए हैं।
नागरिक सचिवालय से जारी सरकारी आदेश के अनुसार यह कार्रवाई झेलम वैली कंस्ट्रक्शनल कॉन्ट्रैक्टर्स एसोसिएशन की ओर से उपराज्यपाल कार्यालय को सौंपी गई एक औपचारिक शिकायत के बाद की गई है। एसएमसी के सीवरेज और ड्रेनेज डिवीजनों में काम करने वाले ठेकेदारों ने आरोप लगाया है कि वित्तीय सलाहकार और मुख्य लेखा अधिकारी भुगतान जारी करने के एवज में कुल बिल राशि पर 1.5 प्रतिशत कमीशन की मांग कर रहे थे।
शिकायत के अनुसार वित्त विभाग के स्पष्ट दिशानिर्देश हैं कि सभी भुगतान ऑनलाइन प्रणालियों (बीम्स और जेकेपेसिस) के माध्यम से बिना किसी फाइल के भौतिक लेन-देन के होने चाहिए। इसके बावजूद नियमों को ताक पर रखकर ठेकेदारों के जरिए फाइलों की हार्ड-कॉपी मंगवाई जा रही थी। यह भी आरोप है कि जो ठेकेदार कमीशन देने से इन्कार करते थे, उनके भुगतानों को पर्याप्त फंड होने के बावजूद तीन-तीन महीने तक लटकाया जाता था जबकि पैसा देने वालों का भुगतान दो दिनों के भीतर कर दिया जाता था। इसके अलावा अधिकारी के कक्ष में आम प्रवेश को सीमित कर दिया गया था।
ठेकेदारों की संस्था की ओर से इस मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो से जांच कराने और दोषी अधिकारी को तुरंत निलंबित करने की मांग के बाद सरकार ने सख्त कदम उठाया है। सरकार ने आवास और शहरी विकास विभाग के विशेष सचिव और अमृत 2.0 के प्रबंध निदेशक विकास को इस मामले का जांच अधिकारी नियुक्त किया है। वहीं श्रीनगर नगर निगम की संयुक्त आयुक्त (प्रशासन) नुजहत खुर्शीद कुरैशी को प्रस्तुतकर्ता अधिकारी बनाया गया है जो जांच में सहयोग के लिए सभी आवश्यक इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और भुगतान रजिस्टर उपलब्ध कराएंगी।
जांच अधिकारी को आदेश जारी होने के 10 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट और सिफारिशें विभाग को सौंपने का निर्देश दिया गया है। जांच में मुख्य रूप से इस बात की समीक्षा की जाएगी कि क्या ऑनलाइन भुगतान प्रणालियों और सामान्य वित्तीय नियमों का उल्लंघन किया गया है। सरकार ने साफ किया है कि इस तथ्यात्मक जांच के निष्कर्षों के आधार पर सक्षम अधिकारी दोषी के खिलाफ अनुशासनात्मक, प्रशासनिक या आपराधिक कार्रवाई शुरू कर सकते हैं।