- रिपोर्ट में खुलासा, भारत में पीसीओएस से जूझ रही हैं 4.4 करोड़ महिलाएं
स्किम्स में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में साझा की गई रिपोर्ट
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। जर्नल ऑफ द अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन में प्रकाशित दुनिया की एक बड़ी स्टडी के मुताबिक, भारत में पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। देशभर में करीब 4.4 करोड़ महिलाएं इस बीमारी से प्रभावित हैं जबकि कश्मीर में लगभग 30 प्रतिशत महिलाएं पीसीओएस से जूझ रही हैं।
यह अध्ययन इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) टास्क फोर्स के तहत किया गया। इसे प्रोफेसर एम अशरफ गनई ने नेशनल कोऑर्डिनेटर के रूप में प्रस्तुत किया। यह रिपोर्ट शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (स्किम्स) में आयोजित एमपी-पीसीओएस सोसायटी के छठे वार्षिक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में साझा की गई।
सम्मेलन के दौरान डॉ. योगिंदर गुप्ता ने बताया कि कश्मीर में पीसीओएस का बोझ विशेष रूप से चिंताजनक है क्योंकि लगभग 30 प्रतिशत महिलाएं इससे प्रभावित हैं। उन्होंने कहा कि यह समस्या बहुआयामी है और इससे निपटने के लिए विभिन्न क्षेत्रों के समन्वित प्रयासों की आवश्यकता है। विशेषज्ञों ने जोर दिया कि पीसीओएस का समाधान अब केवल चिकित्सा स्तर पर संभव नहीं है बल्कि इसके सामाजिक और मनोवैज्ञानिक पहलुओं को भी ध्यान में रखना होगा।
प्रोफेसर एम अशरफ गनई के नेतृत्व में हुए शोध की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि स्किम्स में एकत्रित डेटा ने इस बीमारी की राष्ट्रीय और वैश्विक समझ को मजबूत किया है।शोधकर्ताओं के अनुसार, इस अध्ययन ने इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च को पीसीओएस के क्लिनिकल पहलुओं के साथ-साथ इससे जुड़े सामाजिक कलंक और दीर्घकालिक प्रभावों पर भी गहन अध्ययन करने में मदद की है।
विशेषज्ञों की चेतावनी, वैश्विक महामारी का रूप ले रही ये बीमारियां
स्किम्स ऑडिटोरियम में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में देश-विदेश के विशेषज्ञों ने पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम, एंडोक्राइन विकारों और गैर-संचारी रोगों के बढ़ते खतरे पर चर्चा की। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि ये बीमारियां तेजी से वैश्विक महामारी का रूप ले रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पीसीओएस अब भी कई देशों में एक नजरअंदाज किया जाने वाला स्वास्थ्य मुद्दा है लेकिन स्किम्स में हुए वैज्ञानिक सत्रों और क्लिनिकल रिसर्च से मिली जानकारी भविष्य में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।