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Srinagar News: स्टाफ की भारी कमी से जूझ रहा स्किम्स, सभी बड़ी सर्जरी फिर भी जारी

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-फैकल्टी के 128 और पैरामेडिकल के 763 पद खाली, पांच वर्षों में 36 डॉक्टर हुए सेवानिवृत्त
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अमर उजाला ब्यूरो

श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के मरीजों के लिए जीवनरेखा माना जाने वाला अग्रणी चिकित्सा संस्थान शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (स्किम्स) इस समय डॉक्टरों, कंसल्टेंट्स और पैरामेडिकल स्टाफ की भारी कमी से जूझ रहा है। इसके बावजूद अस्पताल में लगभग सभी प्रमुख सर्जरी की जा रही हैं।
आरटीआई कार्यकर्ता एमएम शुजा की ओर से मांगी गई जानकारी के जवाब में संस्थान के भीतर खाली पड़े पदों और प्रशासनिक चुनौतियों का यह बड़ा खुलासा हुआ है। मिली जानकारी के मुताबिक अगस्त 2020 से अगस्त 2025 के बीच स्किम्स से 36 डॉक्टर सेवानिवृत्त हो चुके हैं। एक फैकल्टी सदस्य ने सेवानिवृत्ति के लिए आवेदन किया है। तीन ने इस्तीफे दिए हैं जो सक्षम प्राधिकारी के पास विचाराधीन हैं। फैकल्टी और कंसल्टेंट्स के स्वीकृत 294 पदों में से केवल 166 पद भरे हुए हैं जबकि 128 पद खाली हैं। पैरामेडिकल स्टाफ की कमी और भी गंभीर है। 1,493 स्वीकृत पदों के मुकाबले केवल 730 कर्मचारी कार्यरत हैं और 763 पद खाली पड़े हैं।
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इस भारी कमी के बावजूद स्किम्स में स्वास्थ्य सेवाएं बिना किसी रुकावट के जारी हैं। सर्जरी के मामले में संस्थान ने स्पष्ट किया है कि केवल दो बेहद जटिल प्रक्रियाओं हाइपरथर्मिक इंट्रापेरिटोनियल कीमोथेरेपी (हाइपेक) और आइसोलेटेड लिम्ब परफ्यूजन (आईएलपी) को छोड़कर बाकी सभी सर्जरी यहां सुचारु रूप से की जा रही हैं। ये दोनों प्रक्रियाएं उपकरण न होने की वजह से रुकी हुई हैं, जिनकी खरीद की प्रक्रिया जारी है। उपकरण आते ही उन्नत कैंसर देखभाल की ये सुविधाएं भी शुरू हो जाएंगी।
संस्थान ने इस मानव संसाधन संकट से निपटने के लिए कदम उठाने भी शुरू कर दिए हैं। आरटीआई के मुताबिक, फैकल्टी के 111 खाली पदों को भर्ती के लिए स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के माध्यम से जम्मू-कश्मीर लोक सेवा आयोग को भेजा गया है जिसमें से 68 पदों का विज्ञापन वर्ष 2025 में जारी किया जा चुका है।
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इसके साथ ही 845 नॉन-गैजटेड और चतुर्थ श्रेणी के पदों को भी भर्ती के लिए भेजा गया है और वित्त विभाग की मंजूरी के बाद अन्य 403 पदों को पुनर्जीवित करने का प्रस्ताव है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इन खाली पदों के जल्द भरने से मौजूदा डॉक्टरों का काम का बोझ कम होगा और मरीजों को और बेहतर इलाज मिल सकेगा।
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