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Srinagar News: लाइफस्टाइल में बदलाव से ही पीसीओएस पर काबू संभव

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स्किम्स सौरा में मूड 2026 अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन। संवाद
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स्किम्स सौरा में ''''मूड 2026'''' अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन संपन्न
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संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (स्किम्स) सौरा के एंडोक्रिनोलॉजी विभाग की ओर से आयोजित एमपी-पीसीओएस सोसायटी का 6वां अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन रविवार को संपन्न हो गया। इस दौरान विशेषज्ञों ने कहा कि लाइफस्टाइल में बदलाव से ही पीसीओएस पर काबू संभव है।
दो दिवसीय इस सम्मेलन में देश-विदेश के विशेषज्ञों ने पीसीओएस, मोटापा, मेटाबोलिक सिंड्रोम और डायबिटीज जैसे विषयों पर गहन चर्चा की। सम्मेलन के समापन अवसर पर श्रीलंका से आए अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ डॉ. मणिल्का सुमनतिलके विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए। उनके अलावा एम्स कल्याणी के प्रेसिडेंट प्रो. वाईके गुप्ता, स्कीम्स के डायरेक्टर प्रो. मोहम्मद अशरफ गनी, कश्मीर विश्वविद्यालय की वीसी प्रो. नीलोफर खान सहित कई प्रमुख विशेषज्ञ मौजूद रहे।
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विशेषज्ञों ने कहा कि पीसीओएस आज एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बन चुका है जो खासकर युवतियों में तेजी से बढ़ रहा है। सम्मेलन में श्रीलंका से आए मुख्य अतिथि डॉ. मणिल्का सुमनतिलके ने कहा कि पीसीओएस से निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर प्रयास जरूरी हैं। उन्होंने वजन नियंत्रण, स्क्रीन टाइम कम करने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने को जरूरी बताया।
इस दौरान स्कीम्स के डायरेक्टर प्रो. मोहम्मद अशरफ ने कहा कि बदलती जीवनशैली के कारण पीसीओएस जैसी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। उन्होंने बताया कि आईसीएमआर ने इस पर टास्क फोर्स बनाई है, जिसमें करीब 200 शोधकर्ता कार्य कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले सम्य में इसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं।
एम्स कल्याणी के प्रेसिडेंट प्रो. वाई.के. गुप्ता ने बताया कि देश में 6 से 25 प्रतिशत महिलाएं पीसीओएस से प्रभावित हैं जबकि कश्मीर में यह आंकड़ा और भी अधिक पहुंच सकता है। उन्होंने कहा कि इस दिशा में सटीक डेटा जुटाने के लिए काम करने की जरूरत है।
योग और मेडिटेशन को बढ़ावा देें

प्रो. नीलोफर खान ने कहा कि पीसीओएस से जुड़े सामाजिक कलंक को खत्म करने की जरूरत है। साथ ही उन्होंने योग व मेडिटेशन को बढ़ावा देना चाहिए की बात कही। कार्यक्रम में मौजूद डॉ. नोमिता चांधोक ने कहा कि इस बीमारी से बचाव के लिए सबसे पहले लाइफस्टाइल में सुधार जरूरी है। शुरुआती महीनों में जीवनशैली पर ध्यान देने के बाद ही दवाओं की जरूरत तय की जानी चाहिए।
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फाइबर व हरी सब्जियों का सेवन बेहद जरूरी
डॉ. अलका मोहन ने संतुलित आहार पर जोर देते हुए कहा कि कोल्ड ड्रिंक जैसे शुगरयुक्त पेय से बचना, नियमित भोजन करना और फाइबर व हरी सब्जियों का सेवन बेहद जरूरी है। उन्होंने एक्सरसाइज, स्ट्रेस मैनेजमेंट और ब्रीदिंग योह को भी जरूरी बताया।
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