अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। सीआरपीएफ की खिलाड़ी रेनु धनु ने गुलमर्ग में आयोजित खेलो इंडिया विंटर गेम्स में शानदार प्रदर्शन प्रदर्शन किया। महज दो साल की कड़ी मेहनत और रेनु ने तीन रजत पदक जीत लिए।
रेनु ने बताया कि वह उत्तराखंड के हल्द्वानी में पली-बढ़ी थीं, जहां सर्दियां ठंडी तो होती थीं लेकिन बर्फ नहीं पड़ती थी। उनके पिता गुजारे के लिए ट्रक चलाते थे, मां घर संभालती हैं। अब एक भाई एयर फोर्स में है, दूसरा कारोबार करता है। हल्द्वानी में स्की ट्रैक नहीं थे। कोई विंटर स्पोर्ट एकेडमी नहीं थी, पहाड़ों जैसे सपने नहीं थे। उसके लिए पढ़ाई पहले थी, जिंदगी पहले थी और खेल के लिए इंतजार करना पड़ा। वर्ष 2021 में रेनु सीआरपीएफ में कांस्टेबल जनरल ड्यूटी के तौर पर शामिल हुईं।
2024 में पोस्टिंग श्रीनगर में हुई। कश्मीर ने उसे एक नई जगह से मिलवाया। और फिर गुलमर्ग ने उसे खुद से मिलवाया। 24 साल की उम्र में पहली बार गुलमर्ग में बर्फ देखी तो ढलानों पर खड़ी होकर उसे देखती रहीं। खेलो इंडिया विंटर गेम्स 2024 में हिस्सा लेने से पहले उसने सिर्फ एक महीने ट्रेनिंग की। वह जीती नहीं लेकिन उसने फिनिश किया।
रेनु ने बताया कि 2025 में और मजबूत होकर लौटीं और एक नॉर्डिक इवेंट में चौथे स्थान पर रहीं। स्की माउंटेनियरिंग रिले में रजत जीता। उसी साल गुलमर्ग में नेशनल विंटर बायथलॉन चैंपियनशिप में स्वर्ण जीता। अब खेलो इंडिया विंटर गेम्स 2026 में नॉर्डिक 15 किमी, नॉर्डिक 1.5 किमी स्प्रिंट और स्की माउंटेनियरिंग रिले में जीते तीन रजत पदक गले में पहनकर पोडियम पर खड़ी हुईं। उनकी कहानी सिर्फ जीतने की नहीं बल्कि यहां तक पहुंचने की कहानी है।
उन्होंने बताया कि सेना का हाई एल्टीट्यूड वारफेयर स्कूल को उसने अपना क्लासरूम बनाया। ओलंपियन कोच नदीम इकबाल ने उसे तकनीक सिखाई और सीआरपीएफ के कोच व टीम मैनेजर ने विश्वास बढ़ाया। जब वह आईं तो विंटर स्पोर्ट्स के बारे में कुछ नहीं पता था। उसने ज्यादा मेहनत की। अब वर्ल्ड चैंपियनशिप में, यहां तक कि ओलंपिक्स भी जीतने का ख्वाब है।