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Srinagar News: निजी अस्पतालों ने 15 अप्रैल से आयुष्मान योजना में उपचार रोकने की दी चेतावनी

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2025 से बकाया भुगतान न मिलने से स्वास्थ्य सेवा प्रदाता मुश्किल में, कहा-अगर कदम नहीं उठाए गए तो आपातकालीन सेवाएं होंगी प्रभावित
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अमर उजाला ब्यूरो

श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में आयुष्मान भारत सेहत योजना के लाभ से लाभार्थी वंचित हो सकते हैं। योजना के तहत पंजीकृत निजी अस्पतालों और डायलिसिस सेंटरों ने बकाया भुगतान में देरी और चिकित्सा से जुड़े सामान की भारी कमी का हवाला देते हुए 15 अप्रैल से सेवाएं रोकने की चेतावनी दी है।
प्राइवेट हॉस्पिटल्स एंड डायलिसिस सेंटर्स एसोसिएशन के एक सदस्य ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि स्टेट हेल्थ एजेंसी से भुगतान महीनों से अटके हुए हैं। कुछ तो जुलाई 2025 से और कुछ मामलों में तो 2021 से भी, जबकि अस्पतालों ने सर्जरी, दिल के ऑपरेशन, स्टेंट लगाने और जान बचाने वाले डायलिसिस सेशन जैसे गंभीर इलाज पहले ही कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि करीब 300 करोड़ की राशि बकाया है।
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एसोसिएशन ने कहा कि सप्लायर्स ने 15 अप्रैल की आखिरी डेडलाइन दी है जिसके बाद वे बकाया बिलों की वजह से जरूरी मेडिकल सामान, इम्प्लांट और उपकरण देना बंद कर देंगे। उन्होंने कहा कि हमने हर दरवाजा खटखटाया है नेताओं से लेकर अफसरों तक। यहां तक कि स्वास्थ्य मंत्री से भी मिले लेकिन इस संकट को सुलझाने के लिए कोई आगे नहीं आया। केवल खोकले दिलासे दिए गए।
स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं ने चेतावनी दी कि अगर यह स्थिति नहीं सुधरी तो उन्हें 15 अप्रैल से गोल्डन कार्ड (आयुष्मान भारत-सेहत योजना) के तहत इलाज बंद करना पड़ेगा जब तक कि बकाया भुगतान क्लियर नहीं हो जाते और सप्लाई चेन फिर से शुरू नहीं हो जाती।
आर्थिक तंगी के बावजूद प्रदाताओं ने कहा कि उन्होंने पिछले कुछ महीनों में बिना किसी रुकावट के मरीजों की सेवा जारी रखी। हमारे स्टाफ और उनके परिवारों ने चुपचाप तकलीफें सहीं। पैसे की कमी के कारण कई लोग रमज़ान, ईद और नवरात्र जैसे त्योहारों को ठीक से नहीं मना पाए। फिर भी, हमने आपकी सेवा करना कभी नहीं छोड़ा।
उन्होंने कहा कि स्टेट हेल्थ एजेंसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अनंत द्विवेदी को भेजे एक पत्र में एसोसिएशन ने लिखा है कि बकाया भुगतान की वजह से जरूरी सामान खरीदने की उनकी क्षमता कमजोर पड़ गई है जिससे स्वास्थ्य सेवाएं देने में वे असल में बंधे हुए महसूस कर रहे हैं।
ईरान-अमेरिका और इस्राइल के बीच चले संघर्ष के कारण मेडिकल सामान की कीमतें लगभग 18 से 22 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं। कीमतों में इस बढ़ोतरी और बकाया भुगतान न मिलने की दोहरी मार ने स्वास्थ्य संस्थानों के लिए सामान खरीदना और भी मुश्किल बना दिया है।
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बकाया भुगतान जारी किया जाए
एसोसिएशन ने अधिकारियों से गुजारिश की है कि मरीजों की देखभाल में कोई रुकावट न आए इसके लिए वे तुरंत बकाया भुगतान जारी करें। उन्होंने यह भी कहा कि वे इस योजना के तहत अपनी सेवाएं जारी रखने को तैयार हैं, बशर्ते सरकार उपचार में इस्तेमाल होने वाले सामान और इम्प्लांट्स की समय पर सप्लाई सुनिश्चित करे।
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