संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। पनुन कश्मीर के एक प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को मुख्य सचिव अटल डुल्लू से मुलाकात की और एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के क्रियान्वयन, प्रवासी शिविरों में घटते नागरिक ढांचे और विस्थापित कश्मीरी पंडितों को प्रभावित करने वाले कई लंबित मुद्दों से संबंधित गंभीर चिंताओं को उजागर किया गया।
शुरुआत में ही प्रतिनिधिमंडल ने पनुन कश्मीर की मांग दोहराई कि विस्थापित कश्मीरी पंडितों के संबंध में वर्तमान एनएफएसए क्रियान्वयन ढांचे को वापस लिया जाए। यह दावा करते हुए कि समुदाय के साथ ऐसा व्यवहार नहीं किया जा सकता। अपने अलग ऐतिहासिक वर्गीकरण, लंबित विस्थापन, और नरसंहार और निर्वासन से उत्पन्न असामान्य परिस्थितियों के कारण एक नियमित कल्याण टेम्पलेट के माध्यम से प्रतिनिधिमंडल ने यह कहा कि समुदाय की विशिष्ट सामाजिक-राजनीतिक स्थिति को सामान्यीकृत कल्याण मानदंडों के यांत्रिक अनुप्रयोग की अपेक्षा अलग और संवेदनशील प्रशासनिक दृष्टिकोण की आवश्यकता है।
प्रतिनिधिमंडल में भूषण लाल भट, समन्वयक शिकायत प्रकोष्ठ एमके धर मीडिया और प्रेस सचिव, बेबूजी ज़ुत्शी पनुन कश्मीर के वरिष्ठ नेता, हरी कृष्ण कौल, सामाजिक कार्यकर्ता और बिटूजी भट, जगटि यूनिट के समन्वयक शामिल थे। प्रतिनिधिमंडल ने आशा व्यक्त की कि बैठक के दौरान जारी किए गए निर्देश जमीन पर जल्दी और प्रभावी क्रियान्वयन में बदलेंगे और विस्थापित कश्मीरियों पंडित समुदाय, जो घाटी से जबरन विस्थापित हुए तीन दशकों से अधिक समय बाद भी निर्वासित जीवन जी रहा है, को लंबे समय से प्रतीक्षित राहत प्रदान करेंगे।