-जम्मू और कश्मीर डायरेक्टरेट ऑफ जियोलॉजी एंड माइनिंग ने जारी किया आदेश
-बिना रुकावट मॉनिटरिंग के लिए इंटीग्रेटेड ई-चेक गेट लगाना हुआ जरूरी
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। जम्मू और कश्मीर डायरेक्टरेट ऑफ जियोलॉजी एंड माइनिंग ने केंद्र शासित प्रदेश में खनिजों के परिवहन और खनन में लगी सभी गाड़ियों में जीपीएस डिवाइस लगाना अनिवार्य करने का आदेश दिया है।
यह निर्देश रविवार को पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से रेत और छोटे खनिजों की आवाजाही की सख्त टेक्नोलॉजी-आधारित निगरानी के उद्देश्य से जारी किए गए हैं। आदेश के मुताबिक सभी खनिज करने वालों को सुनिश्चित करना होगा कि कोई भी खनिज डायरेक्टरेट ऑफ जियोलॉजी एंड माइनिंग के साथ रजिस्टर्ड जीपीएस सक्षम वाहनों के बिना परिवहन न किया जाए। हर वाहन पर एक वैद्य रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (आरएफआईडी) नंबर और विभाग के ऑनलाइन पोर्टल से जनरेट हुआ क्यूआर-कोडेड चालान या वॉटरमार्क होना जरूरी है।
आदेश में कहा है कि इस प्रणाली का मकसद जवाबदेही लागू करना, गैर-कानूनी तरीके से खनिज निकालने पर रोक लगाना और बिना इजाजत इसके परिवहन को रोकना है। आदेश में नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पहले के निर्देशों का भी जिक्र है जिसमें खनिज परिवहन के लिए इस्तेमाल होने वाली गाड़ियों में ट्रैकिंग डिवाइस लगाना जरूरी है। आदेश में क्यूआर कोडिंग, आरएफआईडी टैगिंग, गैंट्री पर एएनपीआर कैमरे और बिना रुकावट मॉनिटरिंग के लिए इंटीग्रेटेड ई-चेक गेट लगाने को भी जरूरी बनाया गया है।
अधिकारियों ने कहा कि इन तकनीकी उपायों से खनिज गतिविधियों का विनियमन मजबूत होगा और जम्मू-कश्मीर नेशनल एनफोर्समेंट स्टैंडर्ड के हिसाब से चलेगा। उन्होंने कहा कि इस कदम का मकसद गैर-कानूनी खनन पर रोक लगाना और जवाबदेही सुनिश्चित करना है।