संवाद न्यूज एजेंसी
बारामुला। एनएचपीसी उड़ी-2 परियोजना से प्रभावित परिवारों के संघ ने बुधवार को गहरी चिंता जताते हुए कहा कि परियोजना से प्रभावित परिवारों की लंबे समय से लंबित मांगों और समस्याओं की लगातार अनदेखी की जा रही है। संघ के अनुसार चार महीने से जारी शांतिपूर्ण धरने के बावजूद उनकी शिकायतों का अब तक समाधान नहीं हुआ है।
प्रभावित परिवार पिछले चार महीनों से उड़ी के सलामाबाद में धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। वे मुआवजे और पुनर्वास से जुड़े मामलों में न्याय, पारदर्शिता और समयबद्ध समाधान की मांग कर रहे हैं। संघ का कहना है कि इतने लंबे आंदोलन और प्रभावित लोगों द्वारा दिखाए गए धैर्य के बावजूद न तो चुनी हुई सरकार का कोई प्रतिनिधि और न ही जिला प्रशासन का कोई अधिकारी धरना स्थल पर पहुंचा और न ही बातचीत की कोई पहल की गई।
संघ की ओर से बोलते हुए ओवैस अहमद ने परियोजना के लाभों के वितरण में गंभीर भेदभाव का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि करीब 20 परिवारों को दोहरा या तिहरा लाभ मिल रहा है, जबकि कई वास्तविक रूप से प्रभावित परिवारों को किसी भी प्रकार का मुआवजा या पुनर्वास सहायता नहीं मिली है। आरटीआई एक्टिविस्ट एडवोकेट नावेद बख्तियार ने कहा कि लोगों ने एनएचपीसी परियोजना के लिए अपनी जमीन और आजीविका कुर्बान की है लेकिन प्रशासन उनकी चिंताओं को स्वीकार करने में विफल रहा है। उन्होंने उड़ी-2 परियोजना के तहत लाभों के वितरण की निष्पक्ष, पारदर्शी और स्वतंत्र जांच की मांग की।