फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Srinagar News: कश्मीर में हवा की गुणवत्ता खराब, ओपीडी केे 40 फीसदी मामले बढ़े

विज्ञापन
श्रीनगर में सुबह के समय धुंध के बीच चलते वाहन। संवाद
विज्ञापन
डॉक्टरों ने सांस और दिल की बीमारियों में बढ़ोतरी की चेतावनी दी, विशेषज्ञों ने स्थायी उपायों की मांग की
विज्ञापन


श्रीनगर। सर्दी बढ़ने से तापमान गिर रहा है। इससे कश्मीर संभाग में हवा की गुणवत्ता लगातार खराब हो रही है। इससे सार्वजनिक स्वास्थ्य को लेकर गंभीर चिंताएं बढ़ रही हैं। ओपीडी केे 40 फीसदी मामले बढ़ गए हैं।
पर्यावरण विशेषज्ञों और डॉक्टरों ने कहा कि खासकर शहरी इलाकों में लंबे समय तक शुष्क मौसम, बढ़ते ट्रैफिक से होने वाला प्रदूषण, बायोमास जलाने और औद्योगिक प्रदूषकों ने प्रदूषण के स्तर को बढ़ा दिया है। घाटी के कई हिस्सों में धुंध की एक साफ परत देखने को मिल रही है जबकि एयर क्वालिटी मॉनिटर ने हाल के दिनों में बार-बार पीएम 2.5 और पीएम 10 के स्तर को सुरक्षित सीमा से ऊपर रिकॉर्ड किया है।
विज्ञापन

प्रदूषण का स्तर ऊंचा बना रहा जिसमें पीएम10 136 से 243 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर और पीएम2.5 86 से 167 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर के बीच रहा। दोनों ही विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमाओं से कहीं अधिक हैं। इसको लेकर चेस्ट स्पेशलिस्ट डॉ. नवीद ने कहा कि हवा की खराब गुणवत्ता सीधे तौर पर सार्वजनिक स्वास्थ्य पर असर डाल रही है। उन्होंने कहा अस्पतालों के ओपीडी में खांसी, सांस फूलने, सीने में जकड़न, आंखों में जलन और गले में खराश की शिकायत करने वाले मरीजों की संख्या बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि मरीजों की संख्या में ओपीडी के मरीजों में करीब 35-40 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखने को मिल रही है और इसके पीछे मुख्य कारण है काफी लंबे समय से सोखी ठंड है। उन्होंने कहा कि सांस की समस्याओं वाले मरीजों की संख्या खासकर क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) और अस्थमा वाले मरीजों की संख्या बढ़ गई है।
डॉक्टर ने कहा कि खराब हवा की गुणवत्ता मौजूदा स्थितियों को और खराब करती है और सांस की तकलीफ की समस्याओं को जन्म देती है। उन्होंने कहा कि बच्चे, बुजुर्ग और पहले से फेफड़ों या दिल की बीमारियों वाले लोग विशेष रूप से कमजोर होते हैं।
डॉक्टरों ने चेतावनी दी कि इसका असर सिर्फ सांस की बीमारियों तक ही सीमित नहीं है। एक अन्य हार्ट स्पेशलिस्ट डॉ. शफी ने कहा कि प्रदूषित हवा के लंबे समय तक संपर्क में रहने से दिल के दौरे, हाई ब्लड प्रेशर, कार्डियक एरिथमिया और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने कहा, बारीक कण खून में चले जाते हैं और सूजन पैदा कर सकते हैं जिससे दिल पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
विज्ञापन

गौरतलब है कि एक अधिकारी ने कहा कि घाटी को कड़ी निगरानी और लंबी अवधि की प्लानिंग की जरूरत है। बिना टिकाऊ शहरी प्रबंधन और कम प्रदूषण के, हमें हर सर्दी में हवा की खराब गुणवत्ता का सामना करना पड़ता रहेगा। इस बीच डॉक्टरों ने लोगों से बचाव के उपाय करने और बाहर कम निकलने, सुबह और शाम की बाहरी गतिविधियों से बचने की सलाह दी है। उन्होंने सलाह दी कि धुंध वाले दिनों में खिड़कियां बंद रखें, बाहर निकलते समय हानिकारक कणों को फिल्टर करने के लिए एन95 या केएन95 मास्क पहनें।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें