- 90 के दशक में आतंकवाद के कारण हुए विस्थापित, कश्मीरी मुस्लिमों ने की मंदिर की रक्षा और देखभाल
संवाद न्यूज एजेंसी
बांदीपोरा। सैकड़ों विस्थापित कश्मीरी पंडित शनिवार को सुंबल में स्थित ऐतिहासिक नंद किशोर मंदिर पहुंचे। वे यहां तीन दिवसीय वार्षिक सुंबली मावस उत्सव में शामिल होने आए हैं। 90 के दशक में कश्मीर में आतंकवाद के कारण विस्थापित रहने के बाद यह उनके लिए अपनी मातृभूमि पर एक भावुक वापसी थी।
यह उत्सव हर साल नंद किशोर की जयंती पर मनाया जाता है। इस अवसर पर भारत के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु यहां प्रार्थना करने, अपनी जड़ों से फिर से जुड़ने और पुराने दोस्तों व पड़ोसियों से मिलने के लिए आते हैं। वार्षिक उत्सवों के दौरान कई विस्थापित परिवार घाटी लौटते हैं जिससे मंदिर परिसर मिलन, पुरानी यादों और आध्यात्मिक भक्ति का केंद्र बन जाता है।
दर्शन के लिए आए एक श्रद्धालु सुनील कौल ने कहा, इतने वर्षों बाद अपनी मातृभूमि पर लौटकर हमें बहुत खुशी हो रही है। हमारी गैर-मौजूदगी में हमारे मुस्लिम पड़ोसियों ने इस मंदिर की रक्षा की और इसकी देखभाल की। हम हमेशा उनके आभारी रहेंगे। सुंबल के स्थानीय निवासी भी इन उत्सवों में शामिल हुए और सामुदायिक भोजन व धार्मिक अनुष्ठानों के आयोजन में मदद की।
स्थानीय निवासी और कश्मीरी मुस्लिम झांगर अहमद ने आयोजन की व्यवस्था में मदद की। उन्होंने कहा, पंडित हमारे परिवार का ही हिस्सा हैं। उनके बिना ये उत्सव अधूरे लगते हैं। हम हर साल इस उत्सव का बेसब्री से इंतजार करते हैं, क्योंकि यह हमें हमारे पुराने पड़ोसियों और हमारी साझा परंपराओं से फिर से जोड़ता है।
समुदाय के सदस्यों ने बताया कि यह उत्सव अब आशा, मेल-मिलाप और कश्मीर की सदियों पुरानी सांप्रदायिक सद्भावना का प्रतीक बन गया है। इस तीन दिवसीय आयोजन के दौरान, कई आगंतुक भावुक होकर अपने पुश्तैनी घरों और बचपन की यादों को फिर से ताज़ा करते हैं।
उपायुक्त ने की सांप्रदायिक सौहार्द की सराहना
बांदीपोरा की डिप्टी कमिश्नर इंदु कंवल चिब ने शनिवार को सुंबल में स्थित ऐतिहासिक नंद किशोर मंदिर का दौरा किया और वार्षिक सुंबली मावस समारोह में हिस्सा लिया। इस दौरान वह उन सैकड़ों विस्थापित कश्मीरी पंडितों के साथ शामिल हुईं जो इस तीन-दिवसीय धार्मिक उत्सव के लिए घाटी में लौटे थे। डिप्टी कमिश्नर ने विशेष प्रार्थनाओं में भाग लिया और उन श्रद्धालुओं से बातचीत की, जो नंद किशोर की जयंती मनाने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों से यहां आए थे।
डिप्टी कमिश्नर ने समारोहों में स्थानीय निवासियों की भागीदारी की सराहना की और कहा कि मुस्लिम समुदाय की सक्रिय भागीदारी कश्मीर की साझा परंपराओं और सांप्रदायिक सद्भाव को दर्शाती है। डिप्टी कमिश्नर ने कहा, यह देखकर बहुत अच्छा लगता है कि स्थानीय समुदाय इस कार्यक्रम में सक्रिय रूप से भाग ले रहा है और बाहर से आए परिवारों का स्वागत कर रहा है। इस तरह के समागम विभिन्न समुदायों के बीच के आपसी संबंधों को मजबूत करते हैं और हमारी सामूहिक विरासत को संरक्षित रखते हैं।