मीरवाइज उमर फारूक ने कहा-साल शुरू होते ही अच्छे की उम्मीद थी, पर मुझे नजरबंद किया गया
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। नए साल के पहले जुमे पर मीरवाइज उमर फारूक ने जामिया मस्जिद की जगह सोशल मीडिया पर तकरीर दी। उन्होंने कहा कि जैसे ही साल शुरु हुआ, हमने अच्छे की उम्मीद की थी। पुराने साल की दर्दनाक यादें फिर ताजा हो उठी हैं। उन्होंने कहा कि एक बार फिर मुझे नजरबंद कर लिया गया।
मीरवाइज ने कहा, स्थायी शांति, भाईचारा और सुलह के लिए मैं अपनी भूमिका को समझता हूं। मैंने भारत के प्रधानमंत्रियों अटल बिहारी वाजपेयी, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और एलके आडवाणी के साथ बातचीत के ईमानदार प्रयासों में हिस्सा लिया है। मेरा रास्ता आज भी वही है। उन्होंने कहा कि कश्मीरी स्वाभाविक रूप से आशावादी होते हैं। बातचीत ने दूसरी जगहों पर काम किया है और हमारी उम्मीद अभी भी कायम है।
मीरवाइज ने इस दौरान पहलगाम हमले और भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध का जिक्र करते हुए कहा कि यह इस बात की याद दिलाता है कि इस क्षेत्र में शांति कितनी नाजुक बनी हुई है। उन्होंने कहा कि यह दुखद है कि भारत के कुछ हिस्सों में कश्मीरियों को शक की नजर से देखा जा रहा है, उन पर हमले हो रहे हैं। निराशा की भावना फैली हुई है, साथ ही अपनी पहचान खोने का अस्तित्व का संकट भी है, क्योंकि राज्य को केंद्र शासित प्रदेश में बदल दिया गया, संवैधानिक गारंटी वापस ले ली गईं, और नियमों और कानूनों में बदलाव किया गया।