कहा- शांतिपूर्ण विरोध को आपराधिक कृत्य के रूप में नहीं माना जा सकता, एफआईआर वापस लेने की मांग
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने वीरवार को कश्मीरी पंडित कार्यकर्ताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने पर चिंता जताई। ये कार्यकर्ता विस्थापित प्रवासी परिवारों के लिए राहत और राशन लाभों के संबंध में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) के लागू होने का विरोध कर रहे थे।
उन्होंने एफआईआर वापस लेने की मांग की। यहां जारी एक बयान में मुफ्ती ने कहा कि कश्मीरी पंडित समुदाय की ओर से उठाई जा रही चिंताएं उनकी विशिष्ट पहचान और विस्थापित प्रवासियों के रूप में उनकी स्थिति के बारे में वास्तविक आशंकाओं से उपजी हैं। ऐसी स्थिति जिसे पिछले कई वर्षों में लगातार आने वाली सरकारों ने स्वीकार किया है। उन्होंने कहा कि दशकों के विस्थापन, अनिश्चितता और आघात के बाद यह समुदाय अपनी आशंकाओं और शिकायतों को आवाज देने के लिए अपराधीकरण के बजाय सहानुभूति और संवाद का हकदार है।
प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए पीडीपी प्रमुख ने कहा कि असहमति का जवाब एफआईआर और डराने-धमकाने से देने की बढ़ती प्रवृत्ति बेहद चिंताजनक है। यह लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति के प्रति एक अस्वस्थ दृष्टिकोण को दर्शाती है। शांतिपूर्ण विरोध को आपराधिक कृत्य के रूप में नहीं माना जा सकता। पीडीपी अध्यक्ष ने कहा कि कई कश्मीरी पंडित संगठनों ने प्रवासी राहत राशन को एनएफएसए के दायरे में लाने के कदम का विरोध किया है। उन्हें आशंका है कि इससे उनकी विशिष्ट प्रवासी स्थिति कमजोर हो सकती है और 1990 के दशक में घाटी से विस्थापित हुए परिवारों के लिए बनाए गए विशेष राहत और पुनर्वास तंत्र धीरे-धीरे खत्म हो सकते हैं।
उन्होंने कहा कि समुदाय के भीतर कई लोग इस कदम को एक मानवीय और विस्थापन-संबंधी अधिकार को एक सामान्य कल्याणकारी योजना में बदलने के प्रयास के रूप में देखते हैं।जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मुद्दे को पुलिस कार्रवाई और कानूनी दबाव के बजाय संवाद और विश्वास-निर्माण के उपायों के माध्यम से हल किया जाना चाहिए।उन्होंने आगे कहा कि कश्मीरी पंडितों द्वारा झेला गया दर्द और विस्थापन एक ऐसी सच्चाई है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्हें प्रभावित करने वाला कोई भी नीतिगत निर्णय समुदाय के साथ सार्थक परामर्श के बाद ही लिया जाना चाहिए।
मुफ्ती ने कहा कि लोकतांत्रिक सरकारों को नागरिकों को शांतिपूर्ण ढंग से अपनी चिंताएं व्यक्त करने के लिए जगह देनी चाहिए और असहमति के हर रूप के खिलाफ पुलिस कार्रवाई का उपयोग करने से केवल अविश्वास और अलगाव ही बढ़ता है। उन्होंने प्रशासन से कश्मीरी पंडित समुदाय के प्रतिनिधियों के साथ पारदर्शी संवाद शुरू करने का आग्रह किया।