श्रीनगर। विशेष न्यायाधीश (एनडीपीएस मामले) ने 910 ग्राम हेरोइन बरामदगी के मामले में एक आरोपी की जमानत अर्जी शुक्रवार को खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि एनडीपीएस अधिनियम की धारा 37 के तहत वैधानिक प्रतिबंध जमानत देने में बाधा है।
जमानत याचिका मामले के दो आरोपियों में से एक गुलाम नबी डार (पालीहारान शीरी बारामुला निवासी) ने दायर की थी। यह मामला पुलिस स्टेशन शाल्टेंग में दर्ज एफआईआर से संबंधित है। मादक पदार्थ की बरामदगी पिछले साल 24 फरवरी को श्रीनगर के बाहरी इलाके सोजेथ में नाका चेकिंग के दौरान एक वाहन से हुई थी।
अभियोजन पक्ष के अनुसार वाहन चालक के भागने की कोशिश के बाद वाहन को रोका गया। ड्राइवर की सीट के नीचे से 910 ग्राम हेरोइन पॉलीथिन बैग बरामद की गई। चालक की पहचान सह-आरोपी इश्तियाक अहमद ख्वाजा के रूप में हुई। जांच के दौरान मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड, बैंक लेन-देन, परिवहन में प्रयुक्त वाहन की मालिकाना हक तथा सह-आरोपी के खुलासे के आधार पर गुलाम नबी डार को मामले में शामिल किया गया।
आवेदक के वकील ने तर्क दिया कि डार से कोई मादक पदार्थ बरामद नहीं हुआ और उसकी संलिप्तता केवल सह-आरोपी के खुलासे पर आधारित है जो सुप्रीम कोर्ट के टोफन सिंह बनाम स्टेट ऑफ तमिलनाडु मामले के फैसले के आलोक में ग्राह्य नहीं है।
न्यायाधीश विनोद कुमार ने इन दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष ने पर्याप्त पुष्ट साक्ष्य प्रस्तुत किए हैं जिनमें आरोपियों के बीच बैंक लेन-देन, नियमित संचार दर्शाने वाले मोबाइल डेटा तथा आवेदक के निवास से कथित लेन-देन में प्रयुक्त फोन की बरामदगी शामिल है। अदालत ने माना कि ये तथ्य केवल कबूलनामे से परे प्रथम दृष्टया संबंध स्थापित करते हैं। संवाद