बॉर्डर टूरिज्म के लिए प्रसिद्ध इस इलाके में दिखी दोनों देशों के लोगों बीच की सरहदों के कारण बेबसी
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। उत्तरी कश्मीर के सीमांत क्षेत्र केरन सेक्टर में एक जनाजे के दौरान आंख नम कर देने वाला दृश्य था। इस दृश्य ने सरहद की हकीकत और बिछड़े परिवारों का दर्द एक बार फिर उजागर कर दिया। नियंत्रण रेखा (एलओसी) से सटे इस इलाके में एक ही परिवार के लोग बीच में सरहद होने के कारण अंतिम विदाई भी साथ नहीं दे सके। दोनों ओर लोगों की आंखें नम हैं और दोनों देशों के बीच की सरहदों के चलते उनकी बेबसी छलक रही है।
रविवार को इलाके के राजा लियाकत अली खान के जनाजे को लोग कंधा दे रहे थे जिनके परिवार के कुछ सदस्य पीओके में भी रहते हैं जोकि नदी के उस पार रोते बिलखते नजर आए। बता दें कि उत्तरी कश्मीर में एलओसी पर स्थित केरन को पीओके से किशनगंगा नदी अलग करती है। किशनगंगा को पीओके में नीलम नदी कानाम दिया गया है। स्थानीय सूत्रों ने बताया कि राजा लियाकत अली खान राजस्व विभाग में नायब तहसीलदार के पद पर कार्यरत थे और जिला गांदरबल में तैनात थे। गत सप्ताह उन्हें हार्ट अटैक आया और उनका इलाज श्रीनगर के शेर ए कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में चल रहा रहा जहां शनिवार को उन्वहोंने दम तोड़ दिया।
केरन के रहने वाले खान का पार्थिव शरीर उनके गांव लाया गया ताकि उन्हें पारिवारिक कब्रिस्तान में दफनाया जाए। पीओके में उनके अन्य पारिवारिक सदस्यों तक इसकी जानकारी स्थानीय मस्जिद के लाउडस्पीकर के जरिए दी गई। लाउडस्पीकर पर हुए एलान को भी नदी के पार गांव में बसे उनके करीबी रिश्तेदारों ने सुना। और जब रविवार को राजा लियाकत अली खान का जनाजा निकला तो किशनगंगा नदी के पार किनारे पर उनके भाई-बहनें और अन्य रिश्तेदार भी जमा हो गए। जनाजा कुछ देर के लिए किशनगंगा के किनारे लाया गया और वहां पर नमाज-ए-जनाजा अदा की गई। सरहदों के दोनों ओर भावुक दृश्य देखने को मिले।पीछे अपनी पत्नी और चार बच्चे छोड़ गया।