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Srinagar News: इंपोर्ट ड्यूटी घटाने से सेब उद्योग को बड़ा नुकसान

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- कश्मीर के किसानों ने दी चेतावनी-लाखों ग्रामीणों की आजीविका पर पड़ेगा असर
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अमृतपाल सिंह बाली

श्रीनगर। वैश्विक व्यापार समझौते के बीच भारत की कृषि आयात नीतियों को बदलने की कोशिश ने अपने ही सेब उत्पादक क्षेत्रों में चिंता पैदा कर दी है। कश्मीर के किसानों ने चेतावनी दी है कि हाल ही में टैरिफ में दी गई छूट एक ऐसे सेक्टर को कमजोर कर सकती है जो लाखों ग्रामीण लोगों की आजीविका का सहारा है।

केंद्र सरकार ने अमेरिकी सेब पर इंपोर्ट ड्यूटी 50% से घटाकर 25% कर दी है। साथ ही मिनिमम इंपोर्ट प्राइस (एमआईपी) 50 रुपये से बढ़ाकर 80 रुपये प्रति किलो कर दिया है। सरकार का कहना है कि ज्यादा एमआईपी घरेलू किसानों की रक्षा करता है लेकिन कश्मीर के सेब उत्पादकों का कहना है कि कम टैरिफ से इंपोर्टेड सेब को उपभोक्ताओं को गलत फायदा मिलेगा।
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घाटी के बाग मालिकों और व्यापारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठन कश्मीर वैली फ्रूट ग्रोअर्स कम डीलर्स यूनियन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे एक पत्र में अमेरिका और यूरोप से आने वाले सेब पर 100 प्रतिशत से ज्यादा इंपोर्ट ड्यूटी लगाने की मांग की है। इस ग्रुप ने चेतावनी दी है कि लगातार उदार आयात से भारत का बागवानी क्षेत्र एक बीमार इंडस्ट्री बन सकता है।

यूनियन के अध्यक्ष बशीर अहमद ने अमर उजाला को बताया कि इंपोर्ट ड्यूटी घटाने से सेब उद्योग को बहुत ही बड़ा नुकसान होगा। कश्मीर के साथ हिमाचल प्रदेश को भी नुकसान होगा। जब सस्ता माल यहां आएगा तो हमारा माल कैसे कोई खरीदेगा। अमेरिका में सब्सिडी और तकनीक के चलते उत्पादन भी अच्छा है और हमारे यहां उत्पादन की लागत में बहुत बढ़ोतरी हो रही है।

जब सस्ता माल यहां पहुंचेगा तो लोग इंपोर्टेड सेब खरीदना चाहेंगे जिससे स्थानीय उद्योग को काफी नुकसान पहुंचेगा। अगर इंपोर्टेड सेब यहां 90-100 रुपये प्रति किलो मिलेगा तो हमारा 50-60 रुपये से ऊपर जाएगा नहीं। सरकार ने वादा किया था कि इंपोर्ट ड्यूटी नहीं घटाएंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अगर घरेलू उत्पाद को बचाना है तो इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ानी होगी। अभी विधानसभा सत्र चल रहा है लेकिन हमारा प्रतिनिधिमंडल जल्द केंद्र सरकार से मिलेगा।

25-28 लाख टन सालाना पैदावार के साथ भारत सेब का 7वां सबसे बड़ा उत्पादक है। इस पैदावार का लगभग 80 प्रतिशत कश्मीर से आता है। यह उद्योग अपने सीधे और अप्रत्यक्ष कामों के साथ कश्मीर में रोजगार देने वाला सबसे बड़ा सेक्टर है जो बागों के प्रति हेक्टेयर हर साल 400 श्रम दिन का काम देता है। 35 लाख लोगों को रोजगार देता है। 2023-24 में हमारे जीएसडीपी में 8 प्रतिशत का योगदान दिया है। अमेरिकी सेब पर ड्यूटी हटाने से न केवल दूसरे सभी देश भारतीय बाजार से बाहर हो जाएंगे बल्कि घरेलू किसानों के लिए भी यह एक बड़ा खतरा बन जाएगा। 2024-25 सीजन में कश्मीर में लगभग 21 लाख टन सेब का उत्पादन हुआ जिनमें से ज्यादातर दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, अहमदाबाद, बेंगलुरु और चेन्नई जैसे भारत के मुख्य बाजारों में बेचे गए।

एक सेब उत्पादक मुश्ताक अहमद वाजा ने कहा कि कम इंपोर्ट ड्यूटी का मतलब है कि विदेशी सेब अभी भी प्रतिस्पर्धी कीमतों पर भारत में आ सकते हैं जिससे पीक सीजन के दौरान स्थानीय किसानों के लिए कीमतें कम हो जाएंगी। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा सिर्फ कीमत का नहीं बल्कि अस्तित्व का है। बढ़ती इनपुट लागत, जलवायु संबंधी फसल नुकसान, ट्रांसपोर्ट में रुकावटें और सीमित कोल्ड स्टोरेज (सीए) सुविधाओं ने पहले ही घरेलू किसानों का मुनाफा कम कर दिया है। उन्हें डर है कि घरेलू मार्केटिंग सीजन के दौरान इंपोर्टेड सेबों की आमद से अर्थव्यवस्था में संकट और बढ़ सकता है।
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ईरान, अमेरिका और यूरोपीय देशों से बार-बार आयात पहुंचा रहा नुकसान

कश्मीर के फल उत्पादकों ने चेतावनी दी है कि ईरान, अमेरिका और यूरोपीय देशों से बार-बार आयात स्थानीय उत्पादकों, खासकर छोटे और सीमांत किसानों को नुकसान पहुंचा रहा है जो पहले से ही बढ़ती इनपुट लागत, अनियमित मौसम, कीटों के हमलों और परिवहन चुनौतियों से जूझ रहे हैं। उन्होंने सरकार से अपील की है कि इसपर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
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