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Srinagar : लाल चौक...दहशत का बाजार नहीं, अब यहां सजती है सैलानियों की महफिल और दिखती है सियासी संगत

Sat, 11 May 2024 06:27 AM IST
दुष्यंत शर्मा नितिन यादव, श्रीनगर

सार

मैं लाल चौक हूं...मैंने कई दौर देखे हैं...चौक पर कुछ पर्यटक दिल्ली से आए थे। उनका कहना था कि कभी यहां से बम धमाकों की खबरें आती थीं, आज यहां ऐसा नजारा होगा, यह सोचा नहीं था। जब दिन और रात में अलग-अलग लाल चौक की रौनक देखो तो मानो वह खुद कह रहा हो...मैं लाल चौक हूं, मैंने कई दौर देखे हैं।
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श्रीनगर लाल चौक (फाइल) - फोटो : बासित जरगर
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विस्तार
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लाल चौक। समय, रात करीब साढ़े 11 बजे। देसी-विदेशी पर्यटकों की भारी चहल-पहल...। रंगीन रोशनी के बीच कश्मीरी चाय का लुत्फ उठाते युवा कपल...। इसी बीच एक पंजाबी परिवार फोटो खींचने का आग्रह करता है। फोटो खींचने के बाद मैंने पूछा, लाल चौक पर लहराते तिरंगे और इस शांति का श्रेय किसे देंगे। सज्जन ने कहा मैं सरकारी कर्मचारी हूं ऐसे में किसी का नाम तो नहीं ले सकते हैं लेकिन यह पीढ़ियों की मेहनत और सालों के इंतजार का फल है। 

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अहम राजनीतिक-सामाजिक केंद्र
दरअसल, लाल चौक श्रीनगर शहर का सबसे अहम राजनीतिक और सामाजिक केंद्र रहा है। इसी लाल चौक से बड़े-बड़े नेताओं ने भाषण दिए हैं तो अशांति के दौर में आतंकियों ने भी लाल चौक को अपना निशाना बनाया। लाल चौक के सर्कल में ही एक दुकान पर बैठे बुजुर्ग बहुत पूछने पर बताते हैं कि हमने अपनी उम्र इसी लाल चौक के इर्द-गिर्द गुजारी है। वो भी दिन रहे हैं जब यहां पर ग्रेनेड फटते थे और लाल चौक लहूलुहान होता था। यहां से जाने वाले संदेश पूरे देश और दुनिया को प्रभावित करते रहे हैं। 

  • इस बार भी कश्मीर की तीन सीटों में से एक श्रीनगर में 13 मई को मतदान है। लाल चौक और इसके आसपास राजनीति से जुड़ी हलचल बढ़ गई है। पिछले दिनों राहुल गांधी अपनी यात्रा के दौरान लाल चौक पर आए थे और तिरंगा फहराया था। इस चुनाव में भी कई प्रत्याशी अपनी सभाएं करेंगे।

आतंकी धमकियों के बावजूद जोशी ने फहराया था तिरंगा
लाल चौक का नाम मास्को के रेड स्क्वाॅयर से भी जुड़ा है। यहां बना घंटाघर इसकी पहचान है। अब यह व्यावसायिक गतिविधियों का बड़ा केंद्र है। इसके आसपास तमाम शोरूम हैं। कहां जाता है कि यहां लाल चौक पर पहली बार शेख अब्दुल्ला के साथ तत्कालीन प्रधानमंत्री नेहरू ने तिरंगा लहराया।

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इसके बाद आतंक के दौर में यहां कई बम कांड हुए। इसी इलाके में एक वरिष्ठ पत्रकार को सरेआम गोलियों से भून दिया गया। इसके बाद लाल चौक तब चर्चा में आया जब आतंकियों की धमकियों के बावजदू भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी ने 1992 में एकता यात्रा के दौरान 26 जनवरी को तिरंगा फहराया। तब पीएम मोदी उनकी इस यात्रा के प्रमुख सारथी थे। इसके बाद लाल चौक पर सरकारी कार्यक्रमों के दौरान तिरंगा फहराया जाता और कई बार अलगाववादियों ने भी यहां पर पड़ोसी देश का झंड़ा फहराने की भी कोशिश की थी।

सेल्फी प्वाइंट, झरना और रंग-बिरंगी रोशनी 
धारा 370 हटने के बाद यहां का माहौल पूरा बदल गया। स्मार्ट सिटी योजना के तहत घंटाघर को नया स्वरूप दिया गया है। नई घड़ी लगाई गई। तिरंगा रोशनी के बीच अब यहां हमेशा तिरंगा लहराता है। चौक को चौड़ा करने के साथ ही रंग-बिरंगी टाइल्स और लाइटें हर किसी को आकर्षित करते हैं। यहां सेल्फी प्वाइंट और झरना भी पर्यटकों को लुभा रहा है। यहीं वजह है कि लोगों की आवाजाही पूरे दिन लगी रहती है। पर्यटक भी बढ़े...टैक्सी ड्राइवर और गाइड नसीम मुस्कुरा कर बताते हैं कि यहां पर्यटकों की संख्या काफी बढ़ी है। वरिष्ठ पत्रकार जफर इकबाल और कश्मीर इकॉनोमिक एलायंस के संस्थापक सदस्य यासीन खान कहते हैं कि अब सरकार को खास कश्मीर से जुड़ी दुकानों को प्रोत्साहन देना चाहिए।

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