संवाद न्यूज एजेंसी
कुपवाड़ा। जिले की एक अदालत ने हिरासत में टॉर्चर के एक मामले में सात आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया है। इस मामले की जांच सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन ने की थी। वहीं, अदालत ने सबूतों की कमी के चलते एक सीनियर पुलिस अधिकारी को बरी कर दिया।
यह आदेश कुपवाड़ा के प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज ने सीबीआई की ओर से दर्ज एफआईआर से जुड़े एक मामले में दिया। अधिकारियों ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर दर्ज एफआईआर में केंद्रीय एजेंसी ने डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस एजाज अहमद नाइकू और अन्य लोगों को नामजद किया था। ये सभी उस समय कुपवाड़ा के जॉइंट इंटेरोगेशन सेंटर में तैनात थे।
अदालत ने पाया कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री जिसमें पीड़ित का बयान और मेडिकल सबूत शामिल हैं। पहली नजर में हिरासत में हिंसा की ओर इशारा करती है। आदेश में यह भी कहा गया है कि शरीर के कई हिस्सों पर पाए गए जख्म, खुद को पहुंचाई गई चोटों के बजाय शारीरिक हमले के कारण लगे प्रतीत होते हैं।
जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज और फोरेंसिक सबूतों की भी जांच की गई। हालांकि फुटेज में पूरी घटना कैद नहीं हो पाई थी, लेकिन अदालत ने कहा कि इस चरण पर यह अभियोजन पक्ष के मामले को पूरी तरह से खारिज नहीं करता है।
नहीं मिला कोई सबूत
डीएसपी एजाज अहमद नाइक को इस मामले से बरी कर दिया गया। अदालत ने माना कि ऐसा कोई सबूत नहीं मिला जिससे यह साबित हो सके कि कथित अपराधों में उनकी सीधी भागीदारी थी, उन्होंने इसमें कोई मदद की थी।
सब-इंस्पेक्टर रियाज अहमद और पुलिस के छह अन्य अधिकारियों जहांगीर अहमद बेग, मोहम्मद यूनुस खान, शाकिर हुसैन, तनवीर अहमद मल्ला, अल्ताफ हुसैन भट और शाहनवाज अहमद दीदा पर आरोप तय किए गए हैं। अब इन सभी पर कांस्टेबल खुर्शीद अहमद चौहान के साथ छह दिनों तक क्रूर और अमानवीय हिरासत में टॉर्चर करने के मामले में मुकदमा चलेगा।