- स्कूलों में ही विद्यार्थियों को दे रहे निशुल्क प्रशिक्षण, कश्मीर की कला और संस्कृति को जीवित रखने के लिए चला रहे मुहिम
अजीम यूसुफ
श्रीनगर। कश्मीर कला मंच स्कूलों में जाकर बच्चों को अभिनय और निर्देशन का हुनर सिखाने में लगा है। साथ ही कश्मीरी संस्कृति को जीवित रखने के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रमों और शिल्प के जरिए प्रयासों में भी जुटा है।
हाल ही में श्रीनगर के टैगोर हॉल में आयोजित संस्कृति और अभिनय के मंच जश्न-ए-तिफ्लान के जरिए दिखाया कि थियेटर के क्षेत्र में भी कश्मीर के बच्चे किसी से पीछे नहीं हैं। कश्मीर कला मंच के निदेशक हकीम जावेद ने बताया कि संस्था के स्वयंसेवक स्कूल से ही बच्चों में अभिनय, निर्देशन और अन्य विधाओं का पैशन पैदा कर रहे हैं। कश्मीर जहां थियेटर न के बराबर हैं। यहां के बच्चों में भी इसकी अच्छी प्रतिभा है लेकिन हम उन्हें अवसर प्रदान नहीं कर पा रहे हैं। कश्मीर कला मंच में बच्चों में छिपे उसी हुनर को तराश रहा है। मोबाइल से दूर कर बच्चों को रंगमंच पर लाना एक बड़ा काम है।
कश्मीर कला मंच श्रीनगर के चार प्रतिष्ठित स्कूलों के विद्यार्थियों को स्कूल में जाकर ही प्रशिक्षण दे रहा है। बच्चों के लिए रंगमंच की कक्षाएं कल मंच के कार्यालय और अन्य जगहों पर भी लगती हैं। बच्चों की हौसला अफजाई के लिए विशेष कार्यक्रम भी चलते रहते हैं। हाल ही में आयोजित जश्न-ए-तिफ्लान इसका एक उदाहरण है। यहां नाटक प्रस्तुत करने वाले बाल कलाकारों में से सर्वश्रेष्ठ कलाकार और निर्देशक भी चुने गए थे। इससे बच्चों का हौसला बढ़ता है। लोगों को भी पता लगता है कि उनके बच्चों में कितनी प्रतिभा है।
रंगमंच की वरिष्ठ कलाकार निगत शफी ने बताया कि बच्चों की प्रतिभा निखारने के लिए कश्मीर कला मंच स्कूल-स्कूल जाकर लगातार बच्चों को सिखा रहा है। जिन बच्चों में कोई भी रचनात्मक काम करने का हुनर है, हम उनके हुनर को निखारने का काम कर रहे हैं। इसका दूसरा फायदा यह है कि बच्चों और युवाओं में खेल, अभिनय और अन्य गतिविधियों का जुनून होगा तो वह नशे से दूर रहेंगे।
अपनी अदाकरी से बड़ों को भी हैरत में डाल रहे बच्चे
हाल ही में हुए कुछ आयोजनों में बच्चों ने अपनी अदाकारी से बड़ों को भी हैरत में डाल दिया है। 8 से 15 साल तक के बच्चे और किशोर प्रतिभाशाली तो हैं ही। इनके अभिनय में भी परिपक्वता झलकती है। हाल ही में नाटक बछुस्न गुनहगार के लिए मिले बेस्ट फीमेल चाइल्ड आर्टिस्ट का पुरस्कार पाने के बाद न्यू कॅरिअर कॉन्वेंट स्कूल फतेहकदल की 12 वर्षीय छात्रा हकीका बेहद उत्साहित हैं और वह इसे कॅरिअर के तौर पर अपनाना चाहती हैं।
वहीं बेस्ट मेल चाइल्ड आर्टिस्ट तनवीर भी छोटी से उम्र में ही अभिनय को लेकर गंभीर है। एक अन्य 10 वर्षीय छात्रा आलिया को पढ़ाई के साथ अभिनय खूब रास आ रहा है। उनके गुरु हकीम जावेद को भी उनमें प्रतिभा का भंडार दिखता है। जान मोहम्मद और फरीद निर्देशन और कैमरा चलाने की ट्रेनिंग ले रहे हैं। उनका कहना है कि अभिनय के अलावा भी कई क्षेत्र हैं जहां बेहतर प्रदर्शन किया जा सकता है। वहीं 14 साल की बीनिश के लिए रंगमंच उनकी भावनाओं को अभिव्यक्त करने का एक माध्यम है।