मार्ग बंद होने का सबसे गंभीर असर काजीगुंड में देखने को मिल रहा है, जहां सैकड़ों ट्रक चालक पिछले तीन दिनों से भीषण परेशानियों के बीच फंसे हुए हैं। हाईवे पर गाड़ियां थम जाने से ड्राइवरों के सामने खाने-पीने और रहने का संकट पैदा हो गया है। प्रशासन की ओर से अब तक राहत या भोजन-पानी की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। इससे चालकों में गहरा रोष है।
शौच जैसी मूलभूत सुविधा न होने से स्थिति और भी खराब हो गई है। ऐसे मुश्किल समय में आसपास के कुछ स्थानीय पेट्रोल पंप मालिक आगे आए हैं, जो मानवता की मिसाल पेश करते हुए ड्राइवरों को नहाने और पीने का पानी उपलब्ध करा रहे हैं।
अपनी आपबीती सुनाते हुए ट्रक चालक गोपाल दास ने बताया कि वे पिछले तीन दिनों से सड़क किनारे कतार में खड़े हैं और उनके पास न तो भोजन का कोई ठिकाना है और न ही पीने के साफ पानी का इंतज़ाम। उन्होंने कहा कि स्थानीय पेट्रोल पंप चालकों की मदद के बिना उनका जीवन और भी कठिन हो जाता। कहा कि उन्हें बानिहाल तक माल छोड़ना है लेकिन आगे जाने की अनुमति नहीं है।
अब माल खराब होने की चिंता भी सता रही है। अन्य ट्रक चालक रविंदर सिंह ने कहा कि तीन दिनों से बिना भोजन के सड़क पर दिन काटने पड़ रहे हैं। जो कुछ अपने पास खाने का सामान था, वहा खत्म हो चुका है। कुछ लाने के लिए करीब 3-4 किमी दूर जाना पड़ता है।
शौचालय की कोई व्यवस्था न होने से चालकों को भारी असहजता का सामना करना पड़ रहा है। जब भी ट्रैफिक पुलिस से रास्ता खुलने के बारे में पूछा जाता है तो उनका कहना होता है कि संबंधित अधिकारियों से अभी तक ग्रीन सिग्नल नहीं मिला है।
उधर, प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि मलबे को हटाने और सड़क साफ करने का काम युद्धस्तर पर जारी है, लेकिन लगातार हो रहे भूस्खलन के कारण मार्ग को अभी यातायात के लिए सुरक्षित घोषित नहीं किया जा सकता है। ट्रैफिक पुलिस ने यात्रियों को सलाह दी है कि वे फिलहाल इस मार्ग पर यात्रा करने से बचें। इसके साथ ही अफवाहों पर ध्यान न देने और ट्रैफिक कंट्रोल यूनिट्स व आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल के माध्यम से ही मार्ग की सही स्थिति की जानकारी लेने की अपील की है।