- जम्मू-कश्मीर यूनाइटेड पीपुल्स अलायंस ने किया हार्ट टू हार्ट सम्मेलन
- कश्मीरी पंडित समुदाय के साथ सिख नेता, ईसाई कार्यकर्ता, मुस्लिम विद्वान, समाजसेवी शामिल हुए
संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। जम्मू कश्मीर यूनाइटेड पीपुल्स अलायंस ने ऐतिहासिक अमर सिंह क्लब, श्रीनगर में हार्ट टू हार्ट सम्मेलन का आयोजन किया। इस सम्मेलन में जम्मू-कश्मीर में संवाद, मेल-मिलाप और सामूहिक समझ को बढ़ावा देने का प्रयास किया गया। एकसुर में आवाज उठी कि स्थायी शांति और समृद्धि केवल संवाद से ही आ सकती है।
सम्मेलन में नागरिक समाज के सदस्य, धार्मिक नेता, बुद्धिजीवी, सामाजिक कार्यकर्ता, युवा प्रतिनिधि, शिक्षाविद, पूर्व लोक सेवक, कानूनी विशेषज्ञ, व्यापारिक नेता और समुदाय प्रतिनिधि एक साथ आए। विभिन्न क्षेत्रों, धर्मों और सामाजिक पृष्ठभूमि का प्रतिनिधित्व करने वाले लगभग सौ प्रतिष्ठित प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कश्मीर, जम्मू और दिल्ली के कश्मीरी पंडित समुदाय के प्रमुख सदस्यों के साथ-साथ सिख नेता, ईसाई कार्यकर्ता, मुस्लिम विद्वान, समाजसेवी, शांति समर्थक और विभिन्न सांस्कृतिक व नागरिक समाज संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
प्रतिभागियों ने सामूहिक रूप से जम्मू-कश्मीर की सदियों पुरानी आपसी सम्मान की परंपरा की पुष्टि की। उन्होंने जोर दिया कि स्थायी शांति और समृद्धि केवल संवाद, सहानुभूति, मेल-मिलाप और सामूहिक नागरिक जुड़ाव के माध्यम से ही उभर सकती है। सैयद सलीम गिलानी ने कहा कि हार्ट टू हार्ट जैसी पहले मतभेदों को पाटने और समुदायों को करीब लाने के लिए महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने जोर दिया कि संवाद, मेल-मिलाप और आपसी समझ जम्मू-कश्मीर के शांतिपूर्ण, समावेशी और समृद्ध भविष्य के निर्माण के लिए सबसे प्रभावी साधन हैं। उन्होंने समाज के सभी वर्गों से विश्वास और समझ के बंधनों को मजबूत करने का आह्वान किया, जो स्थायी शांति की नींव हैं।
वरिष्ठ अधिवक्ता और न्यायविद अशोक भान ने 1980 के दशक से राज्य और गैर-राज्य तत्वों द्वारा किए गए मानवाधिकार उल्लंघन की जांच के लिए एक समयबद्ध और निष्पक्ष सत्य एवं मेल-मिलाप आयोग की स्थापना के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ऐसी प्रक्रिया गहरे सामाजिक घावों को भरने और समुदायों के बीच विश्वास बहाल करने में मदद करेगी। अपनी मातृभूमि में कश्मीरी पंडितों की भौतिक उपस्थिति के बिना कश्मीर अधूरा है। उन्होंने केंद्र सरकार से कश्मीरी पंडितों की सुरक्षित, सम्मानजनक और स्थायी वापसी व पुनर्वास के लिए एक समयबद्ध और व्यापक योजना बनाने का आग्रह किया।
वरिष्ठ नेता मुजफ्फर शाह ने सम्मेलन को जम्मू, कश्मीर और लद्दाख के लोगों के बीच बंधनों को मजबूत करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण नागरिक समाज पहल बताया। उन्होंने जोर दिया कि नागरिक समाज, लोकतांत्रिक संस्थाओं और सरकारी एजेंसियों को मेल-मिलाप, विश्वास निर्माण और सामाजिक स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए मिलकर काम करना चाहिए। सम्मेलन का प्रमुख केंद्र विस्थापित कश्मीरी पंडितों की सुरक्षित, सम्मानजनक और स्थायी वापसी व पुनर्वास था।
प्रतिभागियों ने कहा कि कश्मीरी पंडितों की वापसी केवल एक राजनीतिक या प्रशासनिक मुद्दा नहीं है, बल्कि एक मानवीय और सभ्यतागत अनिवार्यता है। वक्ताओं ने नागरिक समाज, धार्मिक नेताओं, लोकतांत्रिक संस्थाओं और मुस्लिम बहुसंख्यक समुदाय की जिम्मेदारी को रेखांकित किया कि वे विश्वास, भरोसे, सुरक्षा और मेल-मिलाप का ऐसा माहौल बनाएं जो कश्मीरी पंडितों की अपनी मातृभूमि में सम्मानजनक वापसी को सुगम बनाए।
प्रतिभागियों ने माता-पिता, शिक्षकों, शैक्षणिक संस्थानों, धार्मिक विद्वानों, नागरिक समाज संगठनों और सरकारी एजेंसियों से युवा पीढ़ी की रक्षा के लिए रोकथाम, जागरूकता, पुनर्वास और समुदाय आधारित हस्तक्षेप की दिशा में सामूहिक रूप से काम करने का आह्वान किया। इस अवसर पर गठबंधन ने अपना दृष्टिकोण पत्र जारी किया जिसमें शांति, मेल-मिलाप, एकता, समावेशी विकास, सामाजिक न्याय और अंतर-सामुदायिक सहयोग पर केंद्रित एक व्यापक रूपरेखा रखी गई है।