अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। जम्मू और कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन (जेकेएसए) ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर ईरान में रह रहे भारतीय छात्रों की सुरक्षा और उन्हें सकुशल वहां से निकालने के लिए तुरंत दखल देने की मांग की।
जेकेएसए के राष्ट्रीय संयोजक नासिर खुएहामी ने कहा कि जेकेएसए ने प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिख ईरान में रह रहे भारतीय छात्रों की सुरक्षा और संभावित निकासी सुनिश्चित करने के लिए तुरंत दखल देने की मांग की है। एसोसिएशन ने हाल ही में बढ़ी दुश्मनी के बाद बहुत ज्यादा अस्थिर और जानलेवा सुरक्षा स्थिति पर गहरी चिंता जताई।
प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा गया है, आज 28 फरवरी 2026 को, इजरायली डिफेंस फोर्सेज ने कथित तौर पर तेहरान और उसके आसपास के इलाकों सहित ईरानी इलाके में बड़े हमले किए जहां कई धमाके हुए और स्थिति और बिगड़ने की आशंका के बीच इमरजेंसी उपाय लागू किए गए। हालात इतने गंभीर हैं कि एयरस्पेस में रुकावटें आई हैं। आम लोगों के लिए खतरा बढ़ गया है। तेज़ी से बदलते सुरक्षा माहौल ने विदेशी नागरिकों के लिए डर, अनिश्चितता और गंभीर खतरे का माहौल बना दिया है जिसमें ईरान के अलग-अलग शहरों में रहने वाले हजारों भारतीय छात्र भी शामिल हैं। इनमें से ज्यादातर छात्र कश्मीर घाटी से हैं। छात्र अब खुद को एक ऐसे माहौल में पा रहे हैं जो लगातार अस्थिर होता जा रहा है। यहां आने-जाने में रुकावट, कम्युनिकेशन में अनिश्चितता और आगे भी दुश्मनी का खतरा बना हुआ है।
खुएहामी ने आगे कहा कि 23 फरवरी को एडवाइजरी जारी की गई थी जिसमें भारतीय नागरिकों से बढ़ते तनाव को देखते हुए ईरान छोड़ने की अपील की गई थी लेकिन काफी सारे छात्र नहीं जा पाए। खास तौर पर चल रहे सेमेस्टर एग्जाम और इससे भी जरूरी ईरान में दो नेशनल एग्जाम जो एकेडमिक तौर पर बहुत जरूरी हैं 5 मार्च 2026 को होने वाले हैं। ये एग्जाम पोस्टपोन होने के बारे में कोई औपचारिक नोटिफिकेशन न होने पर छात्रों को डर है कि इस स्टेज पर देश छोड़ने से उनका एकेडमिक भविष्य खतरे में पड़ सकता है। इससे कई छात्र मुश्किल में फंस गए हैं। उन्हें लड़ाई-झगड़े वाले इलाके में अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने और अपनी पढ़ाई जारी रखने के बीच चुनना पड़ रहा है।
खुएहामी ने कहा कि एग्जाम शेड्यूल के बारे में जानकारी न मिलने से छात्रों में चिंता और असमंजस बढ़ गया है। उन्होंने जोर दिया कि अगर हालात और बिगड़ते हैं तो भारतीय नागरिकों की सुरक्षित आवाजाही और संभावित निकासी सुनिश्चित करने के लिए कोऑर्डिनेटेड डिप्लोमैटिक बातचीत और स्ट्रक्चर्ड कंटिंजेंसी प्लानिंग बहुत जरूरी हो गई है। उन्होंने कहा कि कश्मीरी छात्रों के अभिभावक और परिवार भी ताजा घटनाक्रम को देखकर बहुत परेशान हैं। अपने बच्चों से लगातार संपर्क बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
एसोसिएशन के ईरान कोऑर्डिनेटर फैजान नबी ने प्रधानमंत्री से विदेश मंत्रालय, तेहरान में भारतीय दूतावास, ईरानी अधिकारियों और संबंधित यूनिवर्सिटी एडमिनिस्ट्रेशन के बीच तुरंत और मजबूत समन्वय सुनिश्चित करने की अपील की।
अमेरिका मिडिल ईस्ट में स्थिरता के लिए सबसे बड़ा खतरा: रुहुल्ला
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर नेशनल कांफ्रेंस के सांसद आगा सैयद रुहुल्ला मेहदी ने कहा कि ईरान पर हुए हमले की निंदा करते हैं। उन्होंने कहा कि अमरीका मिडिल ईस्ट में स्थिरता के लिए सबसे बड़ा खतरा है। उन्होंने ईरान के लोगों की सुरक्षा के लिए दुआ की। रुहुल्ला ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, ट्रंप ने दुनिया से कहा कि वह युद्ध खत्म करेंगे, शुरू नहीं करेंगे। आज उन्होंने वह शुरू किया है जिसे उनके अपने अधिकारी कोई छोटा-मोटा हमला नहीं बल्कि हफ्तों तक चलने वाला लगातार ऑपरेशन बताते हैं। उन्होंने विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर से अनुरोध किया कि ईरान में फंसे सभी कश्मीरियों की सुरक्षा सुनिश्चित करें और उन्हें हर मौजूद रास्ते से निकालें।