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Srinagar News: जम्मू-कश्मीर खेल परिषद ने खेल कोटा भर्ती नियमों पर दी सफाई

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भ्रामक खबरों का खंडन, पेंचक सिलाट और कयाकिंग-कैनोइंग को मिली मान्यता
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संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर खेल परिषद ने खेल कोटा के तहत उत्कृष्ट खिलाड़ियों की भर्ती को लेकर मीडिया और सोशल मीडिया पर चल रही भ्रामक खबरों पर सफाई दी है। परिषद ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह सरकारी नियमों और आदेशों के तहत होती है, न कि किसी के व्यक्तिगत फैसले से।
परिषद ने बताया कि उत्कृष्ट खिलाड़ियों की नियुक्ति का आधार एसआरओ-349/1998, एसआरओ-376/2004, एसओ-149/2021 और अब एसओ-12/2022 है, जिसे एसओ-412/2023 से और स्पष्ट किया गया है। इन आदेशों में मान्यता प्राप्त खेल, पात्रता, उपलब्धियों का मूल्यांकन और चयन की प्रक्रिया तय है। भर्ती का काम एक उच्च स्तरीय चयन समिति करती है, जिसकी अध्यक्षता मुख्य सचिव करते हैं। इसमें गृह और विधि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल होते हैं।
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हर आवेदन की जांच, उपलब्धियों का सत्यापन और नियमों के अनुसार जांच के बाद ही समिति के समक्ष रखा जाता है। परिषद ने कहा कि पेंचक सिलाट को लेकर फैलाया जा रहा भ्रम गलत है। भारत सरकार के युवा मामले और खेल मंत्रालय ने 3 नवंबर 2017 को भारतीय पेनकाक सिलाट संघ को मान्यता दी थी। यह खेल एशियाई खेलों, एशियाई इंडोर और मार्शल आर्ट्स खेलों सहित कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं का हिस्सा है। राष्ट्रीय स्तर पर यह राष्ट्रीय खेलों, खेलो इंडिया और अंतर-विश्वविद्यालय प्रतियोगिताओं में शामिल है।
जम्मू-कश्मीर में पेंचक सिलाट को एसओ-149/2021 और एसओ-12/2022 में शामिल किया गया है। भारतीय पेनकाक सिलाट संघ 2018 से जम्मू-कश्मीर खेल परिषद में भी पंजीकृत है। सीजीएसटी, आयकर विभाग और असम राइफल्स की 2025-2026 की भर्तियों में भी पेंचक सिलाट को जगह दी गई है।
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परिषद ने स्पष्ट किया कि कयाकिंग और कैनोइंग के अंतर्गत ड्रैगन बोट भी एक मान्यता प्राप्त स्पर्धा है। भारतीय कयाकिंग और कैनोइंग संघ और अंतरराष्ट्रीय कैनो फेडरेशन के पत्रों के अनुसार इसमें शांत जल, उग्र जल और समुद्री स्पर्धाएं शामिल हैं। इसी तरह जिम्नास्टिक, फेंसिंग जैसे खेलों में भी कई उप-स्पर्धाएं होती हैं। खेल परिषद ने कहा कि नियमों की गलत व्याख्या और भ्रामक जानकारी से खिलाड़ियों का मनोबल गिरता है। परिषद सरकार की नीतियों को निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। परिषद ने मीडिया और आम लोगों से अपील की कि खेल प्रशासन से जुड़ी खबरों के लिए सरकारी अधिसूचनाओं और आधिकारिक रिकॉर्ड पर ही भरोसा करें।
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