संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। जम्मू कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट में जजों की संख्या जल्द ही बढ़ने वाली है क्योंकि चीफ जस्टिस अरुण पल्ली की अध्यक्षता वाले कॉलेजियम ने जजों के खाली पदों को भरने के लिए 11 नामों की सिफारिश की है। इन सिफारिशों में बार से 10 उम्मीदवार और न्यायिक सेवा से एक उम्मीदवार शामिल हैं। हालांकि हो सकता है कि सभी 11 उम्मीदवारों को पदोन्नति न मिले लेकिन उम्मीद है कि इनमें से काफी लोगों को जज बनाया जाएगा जिससे निकट भविष्य में जजों की संख्या में बढ़ोतरी होगी।
बार से प्रस्तावित नामों में विशाल शर्मा, नामग्याल वांगचुक, जहांगीर इकबाल गनई, पवन कुमार कुंडल, ताहिर माजिद शम्शी, तबस्सुम जफर, अनुपम रैना, विक्रम कुमार शर्मा, अमित गुप्ता और प्रणव कोहली शामिल हैं। वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी यश पाल बोर्नी, जो वर्तमान में जम्मू कश्मीर ट्रिब्यूनल के सदस्य हैं, के नाम की सिफारिश बेंच कोटे से की गई है।खास बात यह है कि तबस्सुम जफर को शामिल किया जाना लैंगिक प्रतिनिधित्व की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यदि इसे मंजूरी मिल जाती है तो वह कश्मीर से जम्मू कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट में जज बनने वाली पहली महिला होंगी।
अब इन नियुक्तियों की जांच सुप्रीम कोर्ट का कॉलेजियम करेगा जिसके बाद केंद्रीय कानून मंत्रालय इन नामों पर आगे की कार्रवाई करेगा, प्रधानमंत्री कार्यालय से मंजूरी ली जाएगी और अंत में नियुक्ति वारंट जारी करने के लिए इन नामों को भारत के राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा। वर्तमान में हाईकोर्ट में जजों के 25 स्वीकृत पदों के मुकाबले केवल 13 जज कार्यरत हैं जिससे 12 पद खाली पड़े हैं। इस पहल का उद्देश्य इस कमी को दूर करना और लंबित मामलों की संख्या को कम करना है।
वर्तमान में कार्यरत जजों में चीफ जस्टिस अरुण पल्ली, जस्टिस संजीव कुमार, जस्टिस सिंधु शर्मा, जस्टिस रजनीश ओसवाल, जस्टिस संजय धर, जस्टिस मोहम्मद अकरम चौधरी, जस्टिस राहुल भारती, जस्टिस मोक्ष खजूरिया काजमी, जस्टिस वसीम सादिक नरगल, जस्टिस राजेश सेखरी, जस्टिस मोहम्मद यूसुफ वानी, जस्टिस संजय परिहार और जस्टिस शहजाद अजीम शामिल हैं।इस साल 23 मार्च को जस्टिस जावेद इकबाल वानी के रिटायर होने के बाद जजों की संख्या घटकर 13 रह गई थी।