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Srinagar News: ईरान में फंसे कश्मीरी छात्रों के माता-पिता की अपील, हमारे बच्चों को सुरक्षित वापस लाओ

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मंडलायुक्त से मिलने पहुंचे ईरान में पढ़ रहे बच्चों के परिजन। संवाद
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-श्रीनगर में कश्मीर के मंडलायुक्त कार्यालय के सामने इकट्ठे हुए अभिभावक, सरकार से तत्काल दखल देने की गुहार
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अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। ईरान में पढ़ रहे कश्मीरी छात्रों के माता-पिता ने अपने बच्चों को वापस लाने की अपील वीरवार को एक बार फिर से श्रीनगर में कश्मीर के मंडलायुक्त कार्यालय के सामने रखी। कई परेशान माता-पिता मंडलायुक्त कार्यालय के पास इकट्ठा हुए और कहा, हमारे बच्चों को सुरक्षित वापस लाया जाए।
सरकार से दखल देने की गुहार लगाते हुए इन माता-पिता ने कहा कि मंडलायुक्त उनकी आवाज आगे पहुंचाए। इस बीच मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की ओर से हस्तक्षेप की बात कहने के बाद उन्होंने संतुष्टि व्यक्त की। बता दें कि ईरान में करीब 3000 भारतीय छात्र हैं जिनमें से करीब 2000 कश्मीर घाटी से हैं।
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श्रीनगर के लाल बाजार की रहने वाली एक महिला ने कहा कि उनकी बेटी ईरान में है। हम यहां परेशान हैं और बच्चे वहां। हमें उसके बारे में कोई जानकारी नहीं है। एम्बेसी ने उन्हें वहां से निकलने के लिए बोला लेकिन निकलने के लिए उड़ानें होनी चाहिए। केंद्र सरकार को देखना चाहिए कि आखिर बच्चे वापस कहां से आएं। उमर अब्दुल्ला के आश्वासन को लेकर उन्होंने कहा कि यह अच्छी बात है कि अगर बच्चों को वापस लाने के लिए उन्होंने हस्तक्षेप किया है। हम बहुत परेशान हैं बच्चों को खाने पीने की दिक्कत आ रही है, इंटरनेट भी नहीं है। एक अन्य महिला ने कहा, जब से ईरान में इंटरनेट बंद हुआ है, बच्चों से कोई संपर्क नहीं हो पाया। अब हम ज्यादा परेशान हो गए हैं। हो सकता है वो वहां ठीक हों लेकिन हमें कोई जानकारी नहीं मिल रही। बच्चों को कहा गया निकलो, एयरबेस भी बंद है, टिकट भी महंगी हैं और हम बच्चों को पैसे भी ट्रांसफर नहीं कर पा रहे इसलिए ऐसे में वह कैसे आएंगे। आज हम डिविजनल कमिश्नर के ऑफिस आए थे। उनसे अपील की है। मुख्यमंत्री को गंभीरता से इसमें हस्तक्षेप करने की जरुरत है।
मेहराजुद्दीन ने कहा कि ट्रम्प ने बोला है कि मैं हमला करूंगा। वहां हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं जैसा कि मीडिया में देखने को मिल रहा है। हम बच्चों की टिकट यहां से करवा देते लेकिन कुछ कम्युनिकेशन नहीं है। इसलिए हम कुछ नहीं कर पा रहे हैं। अब एक ही दुआ है कि बच्चे सही सलामत लौटें।
गौरतलब है कि ईरान और इजरायल के बीच तनाव बढ़ने के दौरान भारत ने ऑपरेशन सिंधु लांच किया था। तब संघर्ष वाले इलाकों से 3,500 से ज्यादा भारतीय नागरिकों को निकाला गया। हालात सामान्य होने के बाद कई छात्र यह सोचकर ईरान लौट गए कि बुरा वक्त टल गया है। अब एक और कम्युनिकेशन ब्लैकआउट का सामना करने पर परिवारों को वही पुरानी स्थिति फिर से महसूस हो रही है। इस बीच अभिभावकों ने यूक्रेन और ईरान जैसे देशों में पहले के सफल ऑपरेशन को याद करते हुए सरकार की इवैक्यूएशन करने की क्षमता पर भरोसा जताया।
उन्होंने कहा, हम केंद्र सरकार के आभारी हैं कि उसने पहले भी छात्रों को मदद दी है। हमें यकीन है कि सरकार उन्हें निकालने का इंतजाम जल्दी कर देगी। माता-पिता ने बताया कि तेहरान में भारतीय दूतावास ने छात्रों को खुद ही देश छोड़ने की सलाह दी है। बता दें कि बुधवार को भी ईरान में पढ़ रहे कई कश्मीरी छात्रों के माता-पिता ने श्रीनगर की प्रेस कॉलोनी में वहां की स्थिति पर चिंता व्यक्त की थी और केंद्र से अपील की थी कि वे क्षेत्र में तनाव के बीच देश से उनकी वापसी में मदद करे।


मैं विदेश मंत्री से आग्रह करती हूं कि वे तुरंत हस्तक्षेप करें : मुफ्ती

पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने वीरवार को केंद्र से अपील की कि वे ईरान में मौजूदा तनाव के बीच फंसे छात्रों जिनमें कश्मीरी छात्र भी शामिल हैं की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए हस्तक्षेप करें। मुफ्ती ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, देश भर से जिसमें कश्मीर के भी हजारों छात्र शामिल हैं मौजूदा अस्थिर स्थिति के बीच ईरान में फंसे हुए हैं। इससे गहरा डर और चिंता पैदा हो गई है। परेशान माता-पिता अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर बहुत चिंतित हैं। मैं विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर और विदेश मंत्रालय से आग्रह करती हूं कि वे तुरंत हस्तक्षेप करें और उनकी सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करें।
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कुछ छात्रों ने अपनी टिकट बुक कर ली हैं, उम्मीद है कि वे कल से आना शुरू कर देंगे : जेकेएसए
जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन (जेकेएसए) के राष्ट्रीय संयोजक नासिर खुएहामी ने कहा कि हमने ईरान में शिराज, अराक, टीयूएमएस और शहीद बेहेश्ती यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले कई भारतीय छात्रों से बात की है जिनमें कश्मीर के छात्र भी शामिल हैं। उनमें से कई ने पहले ही अपनी टिकट बुक कर ली हैं। दावा किया कि वे कल से आना शुरू कर देंगे लेकिन यह सब बदलती स्थिति और ईरानी सरकार से मंजूरी मिलने पर निर्भर करेगा। फिलहाल फ्लाइट ऑपरेशन चालू नहीं हैं।
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