अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर पुलिस के कश्मीर जोन के इंस्पेक्टर जनरल (आईजीपी) विधि कुमार बिरदी ने कहा कि पुलिस कश्मीर में चल रहे नशा-विरोधी अभियान के तहत अगले 100 दिनों में नशा बेचने वालों और तस्करों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई तेज करेगी।
उन्होंने कहा कि यह अभियान जिसे हाल ही में प्रशासन की नशा मुक्त पहल के तहत शुरू किया गया है, एक बहुआयामी दृष्टिकोण अपनाएगा। इसमें सख्त कार्रवाई, जागरूकता और पुनर्वास पर जोर दिया जाएगा। बिरदी ने कहा कि अगले 100 दिनों में हम नशा बेचने और तस्करी में शामिल लोगों के खिलाफ जांच बढ़ाएंगे और एफआईआर दर्ज करने की संख्या बढ़ाएंगे। उन्होंने आगे कहा कि पुलिस पूरी घाटी में अफीम और गांजे की अवैध खेती की पहचान करके उसे नष्ट करेगी।
उन्होंने कहा कि जांच को और मजबूत किया जाएगा जिसमें आरोपियों की वित्तीय गतिविधियों पर नजर रखने, उनकी संपत्तियां जब्त करने और जब्त किए गए नशीले पदार्थों को नष्ट करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि थानों की पुलिस ने बार-बार अपराध करने वालों और उनके तरीकों का रिकॉर्ड भी रखा है ताकि लोगों में जागरूकता बढ़ाई जा सके।
बिरदी ने कहा कि स्कूलों और कॉलेजों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे ताकि युवाओं को नशे के दुरुपयोग के खतरों और नशे की लत से दूर रहने के तरीकों के बारे में शिक्षित किया जा सके। नशे के आदी लोगों के पुनर्वास और उन्हें उपलब्ध उपचार सुविधाओं के बारे में जानकारी देने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
आईजीपी ने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों के आस-पास के इलाकों पर विशेष नजर रखी जाएगी जिसमें ऐसी दुकानें और आउटलेट भी शामिल हैं जिन पर नशीले पदार्थ बेचने का शक है। उन्होंने कहा कि इस अभियान की सफलता के लिए समाज के सभी वर्गों, विशेष रूप से धार्मिक नेताओं की भागीदारी जरूरी है क्योंकि उनकी पहुंच से जागरूकता फैलाने और नशे के इस्तेमाल को हतोत्साहित करने में मदद मिल सकती है।
उन्होंने कहा कि इस समस्या का समाधान सामूहिक प्रयासों में ही निहित है। लोगों को सही राह दिखाने में समाज और धार्मिक संस्थानों की अहम भूमिका होती है। एक नियोजित जागरूकता रैली का जिक्र करते हुए बिरदी ने बताया कि रविवार को एक विशाल रैली आयोजित की जाएगी जिसमें आम जनता और सरकारी अधिकारी शामिल होंगे ताकि नशा-विरोधी अभियान को बढ़ावा दिया जा सके।
उन्होंने बताया कि इस अभियान को जिला स्तर पर मजबूत बनाने और इसमें व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए नागरिक प्रशासन के साथ संयुक्त बैठकें भी आयोजित की गई हैं।