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Srinagar News: हाईकोर्ट ने दो पीएसए के आदेश किए रद्द, जेल से रिहा करने को कहा

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संवाद न्यूज़ एजेंसी
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श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय ने दो लोगों के खिलाफ जम्मू-कश्मीर पब्लिक सेफ्टी एक्ट (पीएसए) के तहत प्रिवेंटिव डिटेंशन को रद्द कर दिया है और उन्हें जेल से रिहा करने का आदेश दिया है।
श्रीनगर के मुसैब अहमद खान के खिलाफ प्रिवेंटिव डिटेंशन ऑर्डर को रद्द करते हुए जस्टिस राहुल भारती की बेंच ने कहा कि विवादित ऑर्डर में साफ तौर पर बिना सोचे-समझे काम किया गया था और इसमें गंभीर कानूनी कमियां थीं। 29 अप्रैल 2025 को श्रीनगर के जिला मजिस्ट्रेट ने जम्मू-कश्मीर पब्लिक सेफ्टी एक्ट 1978 के सेक्शन 8 के तहत डिटेंशन ऑर्डर जारी किया था। इसमें खान को राज्य की सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने वाले काम करने के आरोप में डिटेंशन का आदेश दिया गया था। इसके बाद उन्हें पुंछ की जिला जेल में रखा गया।
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कोर्ट ने देखा कि जिला मजिस्ट्रेट ने दर्ज एफआईआर के रेफरेंस में आईपीसी के सेक्शन 13, 16 और 18 का गलत जिक्र किया था। कोर्ट ने कहा कि ये सेक्शन सिर्फ ''क्वीन'', ''गवर्नमेंट ऑफ इंडिया'' और ''इंडिया'' जैसे शब्दों को परिभाषित करते हैं। इनका आपराधिक दायित्व पर कोई असर नहीं पड़ता। कोर्ट ने आगे बताया कि डिटेंशन ऑर्डर सेक्शन 121 और 121-ए से जुड़े जरूरी कानूनी प्रावधान को ठीक से बताने में विफल रहा। कोर्ट ने कहा कि इस तरह के गलत और गलत रेफरेंस, डिटेंशन का आधार बनाते समय अथॉरिटी के सोच-विचार पर गंभीर शक पैदा करते हैं जिससे आदेश का उल्लंघन होता है और बंदी के व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन करता है।
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यह देखते हुए कि काउंटर एफिडेविट भी गलतियों को ठीक करने में नाकाम रहा कोर्ट ने इस चूक को एक संवैधानिक कोर्ट के सामने प्रिवेंटिव डिटेंशन का बचाव करने में सही सावधानी की कमी को दिखाता है। इसके अनुसार कोर्ट ने डिटेंशन ऑर्डर रद्द कर दिया और अधिकारियों को खान को तुरंत रिहा करने का निर्देश दिया, बशर्ते किसी और मामले में उसकी जरूरत न हो। कोर्ट ने इनायत जावेद गनई की हेबियस कॉर्प्स याचिका भी मान ली और 10 सितंबर, 2024 को जिला मजिस्ट्रेट पुलवामा का पास किया गया डिटेंशन ऑर्डर रद्द कर दिया। कोर्ट ने आगे कहा, याचिकर्ता (गनी) को संबंधित जेल के सुपरिटेंडेंट द्वारा तुरंत रिहा करने का निर्देश दिया जाता है चाहे वह जम्मू-कश्मीर के अंदर हो या बाहर।
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