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Srinagar News: भारी बर्फबारी से शोपियां में जनजीवन अस्त-व्यस्त, लिंक मार्ग अब भी बंद

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शोपियां में बर्फ हटाती प्रशासन की मशीन। संवाद
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- मैदानी इलाकों में बर्फबारी ने बढ़ाईं मुश्किलें, यातायात बुरी तरह प्रभावित
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संवाद न्यूज एजेंसी
शोपियां। जिले में रिकार्ड तोड़ बर्फबारी से पूरे क्षेत्र में सामान्य जीवन अस्त-व्यस्त हो गया। जिले के विभिन्न गांवों और क्षेत्रों को जोड़ने वाले अधिकांश महत्वपूर्ण लिंक मार्ग अब भी बंद पड़े हैं।
बता दें कि विगत 22 जनवरी की रात को केवल ऊंचे इलाकों ही बल्कि मैदानी क्षेत्र में भी जमकर बर्फबारी हुई थी। यह हाल के वर्षों की सबसे भारी बर्फबारी रही। मुख्य सड़कों को साफ करने के बाद जिला प्रशासन ने बर्फ हटाने का काम सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) को सौंपा है। वर्तमान में बीआरओ की टीमें शहर की सड़कों से बर्फ हटाने के लिए प्रशासन के साथ मिलकर प्रयास कर रही हैं ताकि आवश्यक आवाजाही बहाल की जा सके।
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जिले और तहसील मुख्यालयों को जोड़ने वाली लिंक सड़कों के बंद रहने के कारण लोग दैनिक जीवन में परेशानियों का सामना कर रहे हैं। वाहनों की आवाजाही प्रभावित होने आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। स्वास्थ्य सुविधाओं में रुकावट पेश आ रही है। लोग अधिकारियों से बर्फ हटाने के काम में तेजी लाने की मांग कर रहे है।
जिले के मैदानी क्षेत्रों में लगभग ढाई से तीन फीट बर्फ पड़ी है। डेजजान, लाल गुल्ला, मुगल सराय, केलर के उच्च क्षेत्र और खुरपूरा के ऊपरी क्षेत्र सहित अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में लगभग चार फीट बर्फ जमा हो गई है। अब तक विभाग बर्फ को हटाने में विफल रहा है।
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लोगों ने किराये पर बुलडोजर मंगवा रास्ता साफ कराया, शव को किया सुपुर्दे खाक

भारी बर्फबारी ने कनिपोरा-मनलू लिंक रोड पर जीवन रोक दिया है। सड़क बंद होने से एक स्थानीय महिला के शव को सुपुर्दे खाक करने में देरी हुई। कनिपोरा की रहने वाली साजा बेगम का हाल ही में खराब मौसम के दौरान निधन हो गया था। शव को सुपुर्दे खाक करने के लिए ले जाने में गंभीर रुकावटें आईं। स्थानीय निवासियों ने आरोप लगाया कि रोड्स एंड बिल्डिंग्स डिपार्टमेंट के संबंधित अधिकारियों से बार-बार अनुरोध करने के बावजूद बर्फ हटाने वाली मशीन नहीं भेजी गई। तत्काल मदद न मिलने पर ग्रामीणों ने पैसे इकट्ठा किए। इसके बाद किराये पर बुलडोजर मंगवाया गया और सड़क के कुछ हिस्सों को साफ कराया गया। कड़ाके की ठंड में लोगों ने मिलकर एक अस्थायी रास्ता बनाया। एक स्थानीय निवासी ने कहा, यह अफसोस की बात है कि दुख की घड़ी में भी हमें सब कुछ खुद ही करना पड़ा। हम अधिकारियों को फोन करते रहे लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। संवाद
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