श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने शुक्रवार को लंबे समय से चल रहे प्रवासी संपत्ति विवाद में श्रीनगर के एक निवासी को उनके आवासीय मकान का कब्जा बहाल करने का आदेश दिया। कोर्ट ने सिंगल बेंच के उस आदेश को रद्द कर दिया था जिसमें अंतरिम राहत देने से इन्कार किया गया था।
जस्टिस सिंधु शर्मा और जस्टिस शाहजाद अजीम की डिवीजन बेंच ने नूर इलाही फख्तू की ओर से दायर अपील को मंजूर करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे घर की चाबियां फख्तू को सौंप दें। साथ ही घरेलू सामान की सूची तैयार करें। कोर्ट ने जिला मजिस्ट्रेट के 22 मई 2025 के आदेश और 6 दिसंबर 2025 को जारी नोटिस को फिलहाल स्थगित कर दिया है। बेंच ने कहा कि अंतरिम सुरक्षा न मिलने से फख्तू को आश्रय का नुकसान हुआ है। उनके परिवार, खासकर स्कूल जाने वाले बच्चों को गंभीर परेशानी हुई है क्योंकि उनका सामान मकान के अंदर बंद पड़ा है।
कोर्ट ने माना कि अंतरिम राहत का उद्देश्य मुकदमे के विषय को संरक्षित रखना और अंतिम फैसले तक अपूरणीय क्षति को रोकना है। यह विवाद श्रीनगर के हायडरपोरा इलाके की जमीन से जुड़ा है। अपीलकर्ता फख्तू का दावा है कि उन्होंने 1996 में 17 मरले जमीन खरीदी थी और 2004 में नगर निगम की अनुमति से मकान बनवाया था। वहीं, निजी पक्षकार ए.के. कौल का कहना है कि उनके पास जम्मू-कश्मीर माइग्रेंट इमूवेबल प्रॉपर्टी (प्रिजर्वेशन, प्रोटेक्शन एंड रेस्ट्रेंट ऑन डिस्ट्रेस सेल्स) एक्ट, 1997 के तहत 19 मरले जमीन का मालिकाना हक है।
कोर्ट ने कहा कि सिंगल बेंच ने अंतरिम विचार के दायरे से बाहर जाकर मेरिट पर टिप्पणियां कीं, जबकि फख्तू ने प्रथम दृष्टया मामला, सुविधा का संतुलन और अपूरणीय क्षति की संभावना साबित की है। संवाद