- बांदीपोरा में राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय कैंपस की भी मांग रखी
संवाद न्यूज एजेंसी
बांदीपोरा। जम्मू और कश्मीर विधानसभा में अपना दूसरा बजट पेश करने की तैयारी कर रही है। पूर्व विधायक उस्मान मजीद ने रविवार को कहा कि आगामी बजट में कश्मीरी मजदूरों और आम लोगों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। लोग अभी भी मुख्य चुनावी वादों का वास्तविक लाभ मिलने का इंतजार कर रहे हैं जिसमें मुफ्त बिजली, सब्सिडी वाले गैस और रोजगार शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि उनके अनुसार बेरोजगारी, मुद्रास्फीति और उच्च उपयोगिता लागत के चलते अभी भी परेशान हैं। सरकार का यह विधानसभा में दूसरा बजट है और लोग अभी भी संघर्ष कर रहे हैं। सरकार ने चुनाव के दौरान लोगों से वादा किया था कि मुफ्त बिजली, गैस सिलिंडर और रोजगार देगी लेकिन परिवारों को अभी तक कोई सार्थक बदलाव महसूस नहीं हुआ है। बिजली की बढ़ती दरों, महंगी रसोई गैस और स्थिर काम की कमी ने कई परिवारों को वित्तीय संकट में धकेल दिया है। खासतौर पर वे जो दैनिक मजदूरी और मौसमी श्रम पर निर्भर हैं।
उन्होंने कहा घाटी के लोग काफी परेशान हैं। एक मजदूर हर दिन बिजली के बिल, एलपीजी की कीमतों और कल काम होगा या नहीं इस बारे में चिंता करता है। सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि यह बजट केवल कागजों पर ही नहीं, बल्कि दिहाड़ी मजदूरों और गरीबों के लिए अनुकूल हो। पूर्व विधायक ने उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकार से चुनाव के दौरान किए गए वादों को पूरा करने का आग्रह करते हुए कहा कि क्षेत्र में रोजगार के अवसरों की कमी का खामियाजा बेरोजगार युवाओं को भुगतना पड़ रहा है।
उन्होंने बांदीपोरा में राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय कैंपस की स्थापना की भी मांग की। उन्होंने कहा, जिले में छात्रों की बढ़ती संख्या के बावजूद कोई प्रमुख उच्च शिक्षा संस्थान नहीं है। जिला में कोई राष्ट्रीय स्तर का संस्थान नहीं है। हमारे युवाओं को घर पर गुणवत्ता वाली कानूनी शिक्षा तक पहुंच का अधिकार है। उन्होंने स्थानीय विधायकों से अपील की है कि वे विधानसभा में इस मुद्दे को उठाएं और तब तक विरोध करें जब तक जिले के लिए कैंपस को मंजूरी नहीं मिल जाती।