बोली, मैं बहुत खुशकिस्मत हूं कि मुझे ऐसा परिवार मिला जिसने मेरा हौसला बढ़ाया
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। कश्मीर घाटी में ज्यादातर महिलाओं के लिए शादी को पारंपरिक रूप से पढ़ाई-लिखाई के खत्म होने का संकेत माना जाता रहा है लेकिन उत्तरी कश्मीर के बारामुला जिले के टंगमर्ग इलाके की डॉ. सुमैरा रसूल ने इस सोच को पूरी तरह से बदल दिया है। उन्होंने शादी के बाद अपने ससुराल वालों के सहयोग से राजस्थान यूनिवर्सिटी से अपनी पीएचडी पूरी की।
डॉ. सुमैरा ने बताया कि अक्सर शादी के बाद लड़कियां अपने सपनों का पीछा नहीं करतीं, खासकर कश्मीर के ग्रामीण क्षेत्रों में। हो सकता है कि कुछ हालात रुकावट बन जाते हों। लेकिन मेरे लिए मेरे ससुराल वाले मेरी ताकत बने और मेरे पति ने मेरा हाथ बंटाया। टंगमर्ग के तकिया भटपोरा इलाके की रहने वाली सुमैरा ने शादी से पहले अपनी बीएससी पूरी कर ली थी। शादी के बाद उन्होंने अपनी बीएड, एमएससी और आखिर में अपनी डॉक्टरेट पूरी की।
उन्होंने कहा कि मेरी एमएससी में दाखिले की खबर ठीक मेरी शादी के दिन आई थी। मैं हंस रही थी और सोच रही थी कि अब इसे कैसे संभालूं। सबसे पहले मैंने यह बात अपने पिता को बताई क्योंकि शादी के बाद ससुराल वालों की इजाजत को ज्यादा अहमियत दी जाती है। मैंने सोचा शायद मुझे यहीं रुक जाना चाहिए लेकिन मेरे ससुराल वालों ने ही मुझे आगे बढ़ने की इजाजत दी। डॉ. सुमैरा का मानना है कि एक लड़की को पढ़ाना पूरे घर को रोशन कर देता है। मैं बहुत खुशकिस्मत हूं कि मुझे ऐसा परिवार मिला जिसने मेरा हौसला बढ़ाया।
हर पिता को अपने संदेश में डॉ. सुमैरा ने कहा कि जिस तरह आप अपनी बेटी के सपनों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाते हैं, उसी तरह अपनी बहू के सपनों को पूरा करने में भी अहम भूमिका निभाएं। आखिर वह भी तो एक बेटी ही है। उन्होंने लड़कियों से कहा कि अपने सपनों को डूबने मत दो। उनका पीछा करो, चाहे चुनौतियां या हालात कैसे भी हों। सपने सच जरूर होते हैं।
डॉ. सुमैरा मानती हैं कि उनकी जिंदगी का सफर आम नहीं रहा है। कई लोगों के लिए शादी के बाद रसोई ही उनकी पूरी दुनिया बन जाती है। मुझे आजादी मिली और इसी बात ने सारा फर्क पैदा कर दिया।