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मानवता, करुणा, गरीबों के प्रति चिंता समय की मांग: डॉ. अब्दुल्ला

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श्रीनगर। नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने शनिवार को कहा कि बेहतर और शांतिपूर्ण समाज के सृजन के लिए न केवल धार्मिक शिक्षाओं का पालन करना आवश्यक है, बल्कि मानवता, करुणा, भाईचारा और गरीबों के प्रति चिंता को बढ़ावा देना भी जरूरी है। ये मूल्य मानवीय गरिमा, सम्मान और सामाजिक सद्भाव की नींव हैं।
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उन्होंने श्रीनगर में एक समारोह को संबोधित करते हुए ये शब्द कहे। समाज में बढ़ती सामाजिक बुराइयों और अवांछनीय प्रथाओं, विशेष रूप से नशे की बढ़ती प्रवृत्ति पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए, उन्होंने आशा व्यक्त की कि समाज का हर वर्ग नशे के खिलाफ जारी लड़ाई में सक्रिय भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि सामूहिक प्रयासों से इस बुराई को जड़ से खत्म करने में मदद मिल सकती है।
डॉ. अब्दुल्ला ने युवा पीढ़ी पर मोबाइल फोन और सोशल मीडिया के अत्यधिक और गैर-जिम्मेदाराना उपयोग के प्रतिकूल प्रभाव पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह प्रवृत्ति युवाओं के कीमती समय और भविष्य को प्रभावित कर रही है। उन्होंने माता-पिता, शिक्षकों और समाज के जिम्मेदार सदस्यों की आवश्यकता पर बल दिया कि वे युवाओं का उचित मार्गदर्शन करें और उन्हें सकारात्मक गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करें।
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डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि अल्लाह ने पार्टी विधायकों को लोगों की सेवा करने का अवसर दिया है, जो एक बड़ी जिम्मेदारी और पवित्र अमानत दोनों है। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों का प्राथमिक कर्तव्य लोगों की समस्याओं और कठिनाइयों को गंभीरता से सुनना और उन्हें हल करने के लिए हर संभव प्रयास करना है। डॉ. फारूक ने पूर्व विधायक शेख गुलाम कादिर परदेसी की याद में आयोजित शोक सभा में भाग लेने के लिए शिवपोरा का दौरा भी किया। संवाद
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