- 1548 सेवाएं पहले ही ऑनलाइन, 302 और होंगी पेपरलेस, 32 आपराधिक प्रावधान खत्म, 19 पुराने कानून रद्द
संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। मुख्य सचिव अटल डुल्लू ने सभी प्रशासनिक सचिवों के साथ उच्च स्तरीय बैठक कर प्रधानमंत्री के रिफॉर्म एजेंडे पर अमल की समीक्षा की। सोमवार को हुई बैठक में होल ऑफ गवर्नमेंट अप्रोच, सेवाओं के पूर्ण डिजिटलीकरण और प्रक्रियाओं के सरलीकरण पर जोर दिया गया।
मुख्य सचिव ने कहा कि इन सुधारों का मकसद एकीकृत शासन, नागरिक-केंद्रित प्रशासन और तकनीक आधारित व्यवस्था बनाना है। उन्होंने साफ किया कि विभाग पुराने ढर्रे से हटकर आपसी तालमेल से काम करें ताकि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल किया जा सके। योजना विकास एवं निगरानी विभाग ने एक्शन टेकन रिपोर्ट पेश की। बताया गया कि वित्त, स्कूल शिक्षा, कौशल विकास, स्वास्थ्य, शहरी विकास, कृषि, समाज कल्याण, पीडब्ल्यूडी, पर्यटन और उच्च शिक्षा समेत कई विभागों ने अंतर-विभागीय समन्वय और डिजिटल एकीकरण वाला मॉडल अपना लिया है।
स्कूल शिक्षा विभाग ने बताया कि 1350 से ज्यादा स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा शुरू हो चुकी है और 1.41 लाख से अधिक छात्र जुड़ चुके हैं। एनईपी-2020 के तहत डिजिटल प्लेटफॉर्म, आईसीटी लैब और स्मार्ट क्लासरूम भी बनाए गए हैं। कौशल विकास विभाग मिशन युवा और पीएम विश्वकर्मा जैसी योजनाएं कई विभागों, बैंकों और शैक्षणिक संस्थानों के साथ मिलकर चला रहा है। बैठक में बताया गया कि जन विश्वास सुधारों के तहत 20 कानूनों के 32 आपराधिक प्रावधानों को गैर-अपराधी बनाया गया है ताकि लोगों पर अनुपालन का बोझ कम हो। साथ ही 19 पुराने कानून रद्द कर दिए गए हैं।
डिजिटल मुख्य सचिव ने सभी सरकारी-से-नागरिक (जी2सी) सेवाओं को पूरी तरह डिजिटल करने पर जोर दिया। अभी ई-उन्नत प्लेटफॉर्म पर 1548 सेवाएं ऑनलाइन हैं और करीब 300 और तैयार हो रही हैं। पहले चरण में कृषि, उच्च शिक्षा, शहरी विकास, राजस्व, स्वास्थ्य और बिजली विभाग की 302 सेवाओं को पूरी तरह पेपरलेस किया जाएगा।
डुल्लू ने विभागों को डिजिटलीकरण से पहले प्रक्रिया में सुधार करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि जी2जी, जी2बी और जी2सी की सभी प्रक्रियाओं को आसान बनाया जाए ताकि नागरिकों को तेज और सरल सेवाएं मिलें। बैठक में विजन 2030 और विजन 2047 के लक्ष्यों की भी समीक्षा हुई। कई विभागों ने अपने लक्ष्य, उपलब्धि और गैप एनालिसिस सौंप दिए हैं। बाकी विभागों से जल्द इनपुट मांगा गया है ताकि जम्मू-कश्मीर का व्यापक विजन डॉक्यूमेंट तैयार हो सके।