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श्रीनगर एयरपोर्ट बंदी का फैसला टलना बड़ी राहत, अमरनाथ यात्रियों को अन्य जगहों पर घूमने की भी मिले इजाजत : उमर अब्दुल्ला

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अमर उजाला ब्यूरो
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श्रीनगर। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एएआई) की ओर से श्रीनगर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के रनवे को रखरखाव के लिए पूरी तरह बंद करने के प्रस्तावित फैसले को वापस लेने का स्वागत किया है। उन्होंने इसे एक बड़ी राहत बताया है। साथ ही सीएम ने कहा, अमरनाथ यात्रियों को अन्य जगहों पर घूमने की इजाजत दी जानी चाहिए।
पत्रकारों से बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सोमवार और मंगलवार को उड़ानें बंद रखने के प्रस्ताव का बहुत बुरा असर पड़ रहा था। अभी कल ही उनकी पर्यटन क्षेत्र के कुछ लोगों से बात हुई थी जिन्होंने बताया कि कई पर्यटक समूहों ने अपनी बुकिंग रद्द करना शुरू कर दिया था। उन्होंने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू से बात की थी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के दौरान भी इस मुद्दे को उठाया था।
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उन्होंने कहा कि यदि इन प्रयासों का परिणाम यह निकला है कि सोमवार और मंगलवार का शेड्यूल सामान्य रहेगा तो यह घाटी के लिए बहुत बड़ी राहत है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि अक्तूबर में रखरखाव के लिए एयरपोर्ट को बंद करना जरूरी हो तो अवंतिपोरा एयरफोर्स बेस पर वैकल्पिक उड़ान संचालन की व्यवस्था की जानी चाहिए। बाद में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भी उन्होंने दोनों केंद्रीय मंत्रियों का आभार व्यक्त किया।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री की उस अपील का भी स्वागत किया जिसमें उन्होंने अमरनाथ तीर्थयात्रियों से अपने यात्रा बजट का कम से कम 10 प्रतिशत हिस्सा स्थानीय उत्पादों पर खर्च करने का आग्रह किया था। उमर ने कहा कि इससे स्थानीय लोगों को सीधा फायदा होगा। उन्होंने महत्वपूर्ण सुझाव देते हुए कहा कि तीर्थयात्रियों को केवल यात्रा तक ही सीमित रखने के बजाय अन्य जगहों पर भी जाने की अनुमति दी जानी चाहिए। यदि उन्हें थोड़ा घूमने दिया जाए तो वे अपना 10 प्रतिशत बजट यहां खर्च कर पाएंगे जिससे घाटी के लोगों को मदद मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि इस बार भारी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आएंगे और सुरक्षित लौटेंगे। उन्होंने कहा कि चुनी हुई सरकार की ओर से जो भी प्रशासनिक व्यवस्थाएं की जा सकती थीं, वे की गई हैं। सुरक्षा और श्राइन बोर्ड की व्यवस्थाएं लोक भवन के माध्यम से देखी जा रही हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे बाबा बर्फानी से जम्मू-कश्मीर में भाईचारे और शांति के लिए विशेष प्रार्थना करें।
जब मुख्यमंत्री से भारत-पाकिस्तान वार्ता और स्थायी शांति की अपील करने वाले एक पत्र के बारे में पूछा गया, जिस पर उनके पिता डॉ फारूक अब्दुल्ला सहित 61 भारतीयों और 55 पाकिस्तानियों ने हस्ताक्षर किए हैं तो उन्होंने मीडिया से इस पर अनावश्यक विवाद न खड़ा करने को कहा। उन्होंने तीखे अंदाज में कहा कि जब आरएसएस के नेता इस तरह की बात कहते हैं तो कोई भी एजेंसी या चैनल इसे इस तरह हाइलाइट नहीं करता लेकिन जब फारूक अब्दुल्ला हस्ताक्षर करते हैं या वे खुद कुछ बोलते हैं तो मीडिया तुरंत भाजपा नेताओं के पास प्रतिक्रिया लेने पहुंच जाता है।
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उन्होंने जोर देकर कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने भी यही रास्ता दिखाया था कि दोस्त बदले जा सकते हैं लेकिन पड़ोसी नहीं। इसलिए आज नहीं तो कल, अपने पड़ोसियों के साथ बेहतर संबंध बनाने ही होंगे। मुख्यमंत्री ने पंजाब सरकार द्वारा कश्मीर के मटन व्यापारियों पर लगाए गए मंडी टैक्स को वापस लेने के फैसले का भी स्वागत किया।
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