पुलवामा में हांगुल प्रजनन केंद्र। संवाद
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- दक्षिण कश्मीर में एक दशक बाद फिर से शुरू हुआ प्रजनन केंद्र, कश्मीरी हिरण की एक प्रजाति है हांगुल
संवाद न्यूज एजेंसी
पुलवामा। दक्षिण कश्मीर के पुलवामा के त्राल में बना हांगुल ब्रीडिंग सेंटर एक बार फिर से कश्मीरी हिरण की प्रजाति को सहेजेगा। करीब एक दशक बाद इस प्रजनन केंद्र को फिर से शुरू किया जा रहा है।
अधिकारियों के अनुसार त्राल इलाके की शिकारगाह में कश्मीरी हिरण हांगुल की एक्स-सीटू ब्रीडिंग और संरक्षण के लिए इस प्रजनन केंद्र को वर्ष 2008 में खोला गया था। उस दौरान इसमें एक हांगुल लाया गया था। बाद में एक तेंदुए के हमले में वह मारा गया था। तबसे एक दशक से भी अधिक समय से यह प्रजनन केंद्र बंद था। अब वन्यजीव संरक्षण विभाग ने इस सेंटर को एक बार फिर से चालू कर दिया है। सेंटर में जानवरों को शिकार होने से बचाने के लिए इस बार जरूरी कदम उठाए गए हैं।
शोपियां डिवीजन के वाइल्डलाइफ वार्डन इंतिसार सुहैल ने कहा, हांगुल एक गंभीर रूप से लुप्तप्राय प्रजाति है जो केवल कश्मीर में पाई जाती है। पिछले 70-80 सालों में हांगुल की संख्या में गिरावट आई है। विभाग ने इसके संरक्षण के लिए कई कदम उठाए हैं। संरक्षण के प्रयासों को मोटे तौर पर दो श्रेणियों में बांटा गया है। इन-सीटू और एक्स-सीटू।
इन-सीटू संरक्षण में जानवर के जंगली आवास जैसे दाचीगाम (श्रीनगर में वन्यजीव अभयारण्य) और उसके आस-पास के इलाकों की रक्षा और संरक्षण करने की कोशिश की जाती है। इसके अवैध शिकार को रोकने के लिए कदम उठाए जाते हैं। सरकार द्वारा चलाए जा रहे एक्स-सीटू कार्यक्रम में प्रजाति को एक सीमित क्षेत्र में पाला जाता है। इसी सिलसिले में त्राल की शिकारगाह में यह सुविधा बनाई है।
पांच मादा और एक नर को रखा गया है यहां
इंतिसार सुहैल ने बताया कि हाल ही में हमने पांच मादा हांगुल को पकड़ने में सफलता हासिल की है जिससे ब्रीडिंग कार्यक्रम के सफल होने की हमारी उम्मीदें बढ़ गई हैं। पिछले महीने प्रयास किए गए थे जब एक वन्यजीव टीम ने दाचीगाम वन्यजीव अभयारण्य में एक नर हंगुल को पकड़ा। हमने उसे सुरक्षित रूप से त्राल के शिकारगाह में स्थित ब्रीडिंग सेंटर में पहुंचाया। यह कार्यक्रम एक लंबी प्रक्रिया है। एक बार सफल होने के बाद यह इस प्रजाति की संख्या बढ़ाएगा। हंगुल के बच्चों को जंगल में छोड़ दिया जाएगा। यह भविष्य में उनकी आबादी को स्थिर करने में मदद करेगा। यह सुविधा सेंट्रल जू अथॉरिटी ऑफ इंडिया के सहयोग से बनाई गई थी। संरक्षण के प्रयासों में इस महत्वपूर्ण पड़ाव के लिए कॉम्पेंसेटरी एफॉरेस्टेशन फंड मैनेजमेंट एंड प्लानिंग अथॉरिटी के फंड का भी इस्तेमाल किया गया है।