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Srinagar News: कलम छोड़ उठाई कुदाल, ऑर्गेनिक खेती से रोजगार दे रहे बिलाल

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पुलवामा के बिलाल अहमद शेख। संवाद
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पुलवामा के मुर्रान गांव के शिक्षक ने खेती को बनाया मुनाफे का सौदा
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युवाओं के लिए बने प्रेरणास्रोत, 20 परिवारों के लिए बने आर्थिक रीढ़

यूनिस खालिक
पुलवामा। कश्मीर के शिक्षित युवा अब केवल सरकारी नौकरियों के भरोसे न रहकर उद्यमिता के नए आयाम स्थापित कर रहे हैं। पुलवामा जिले के मुर्रान गांव के रहने वाले बिलाल अहमद शेख ने उच्च शिक्षा और शिक्षण क्षेत्र को छोड़कर ऑर्गेनिक खेती की ओर कदम बढ़ाए हैं। आज वह न केवल पर्यावरण संरक्षण में योगदान दे रहे हैं, बल्कि वर्मीकम्पोस्ट इकाई के माध्यम से दर्जनों परिवारों को रोजगार भी मुहैया करा रहे हैं।

दक्षिण कश्मीर के पुलवामा के बिलाल अहमद शेख के पास पोस्टग्रेजुएट और बीएड जैसी उच्च डिग्रियां हैं। उन्होंने शिक्षा क्षेत्र में एक दशक बिताने के बाद खेती की दुनिया में एक नई मिसाल पेश की है। एक दशक तक उन्होंने एक निजी संस्थान में शिक्षण कार्य भी किया। अब उन्होंने मिट्टी की सेहत सुधारने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के संकल्प के साथ ऑर्गेनिक खेती को अपनाया।
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बिलाल ने इस सफर की शुरुआत अपने छोटे भाई के साथ मिलकर की जो बायोटेक्नोलॉजी में एमएससी हैं। दोनों भाइयों ने अपने पैतृक गांव में वैज्ञानिक तकनीकों का उपयोग कर वर्मीकम्पोस्ट (केंचुआ खाद) बनाने की इकाई स्थापित की। केंचुओं के माध्यम से कचरे को पोषक तत्वों से भरपूर खाद में बदलकर उन्होंने न केवल अपशिष्ट प्रबंधन किया बल्कि किसानों को रासायनिक उर्वरकों का एक सुरक्षित विकल्प भी दिया।

20 परिवारों को मिल रहा है रोजगार

बिलाल की बनाई खाद की गुणवत्ता इतनी बेहतर है कि स्थानीय किसानों के बीच इसकी मांग तेजी से बढ़ी है। वर्तमान में उनकी यह यूनिट क्षेत्र के लगभग 20 परिवारों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार प्रदान कर रही है। स्थानीय निवासियों और कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे स्टार्टअप्स से न केवल रासायनिक खादों पर निर्भरता कम होगी बल्कि कश्मीर में स्थायी खेती को भी बढ़ावा मिलेगा।
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कश्मीर के युवाओं के लिए अपार संभावनाएं
बिलाल अहमद शेख का मानना है कि कृषि-आधारित उद्यमिता में कश्मीर के युवाओं के लिए अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं को केवल पारंपरिक नौकरियों के पीछे भागने के बजाय नवाचार पर ध्यान देना चाहिए। अगर समर्पण और सही योजना के साथ काम किया जाए तो ऑर्गेनिक खेती पर्यावरण और जेब दोनों के लिए फायदेमंद है। संवाद
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