- हंसराज और सोन्या मोहन प्रामाणिक बने हाफ मैराथन चैंपियन, विजेताओं को नकद पुरस्कार
संवाद न्यूज एजेंसी
बारामुला। जून रन फेस्टिवल ऑफ बारामुला मैराथन रविवार को उत्सवी माहौल में संपन्न हुई। श्रीनगर के बाहर घाटी के सबसे बड़े रोड-रनिंग आयोजनों में से एक इस मैराथन में 800 से ज्यादा धावकों ने हिस्सा लिया। देशभर के शीर्ष धावकों को नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
बारामुला में 19 इन्फैंट्री डिवीजन के जीओसी मेजर जनरल मनोज जोशी ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। पुरुष हाफ मैराथन 21 किमी में हंसराज ने 1:11:30 के समय के साथ खिताब जीता। मनोज कुमार सिंह दूसरे और बलविंदर सिंह तीसरे स्थान पर रहे। महिला वर्ग में सोन्या मोहन प्रामाणिक ने 1:45:00 में दौड़ पूरी कर खिताब अपने नाम किया। गुरप्रीत कौर दूसरे और क्षीरसागर रामास्मिता तीसरे स्थान पर रहीं।
10 किमी में अजय कुमार और शमशाद बानो ओवरऑल विजेता बने। 5 किमी में बरकत अली और हरमेहर कौर ने बाजी मारी। चार आयु वर्गों में पुरुष-महिला की 5, 10 और 21 किमी दौड़ हुई, हर वर्ग में शीर्ष तीन को नकद पुरस्कार दिए गए।
अंडर-35 में हंसराज और जैनब फरहीन फयाज, 36-45 में मनोज कुमार सिंह और सोन्या मोहन प्रामाणिक, 46-55 में जोगा सिंह और क्षीरसागर रामास्मिता, 56+ में कृष्ण कुमार और ज्योति प्रोवा दत्ता खानिकर विजेता रहे।
5 किमी दौड़ में करीब 350 धावकों ने हिस्सा लिया, जिसमें 120 से ज्यादा महिलाएं शामिल थीं। यह दिन की सबसे लोकप्रिय दौड़ रही। 10 साल से कम उम्र के करीब 40 बच्चों ने विशेष रन में भाग लिया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा।
आयोजक चंदीप सिंह ने बताया कि मैंने 5 साल पहले सिर्फ यह देखने के लिए दौड़ना शुरू किया था कि क्या मैं दौड़ने के काबिल हूं या नहीं। मुझे लगा कि मैं उतना फिट नहीं हूं, इसलिए मैंने अपनी दौड़ने की क्षमता को बेहतर बनाने के तरीके खोजने शुरू किए। धीरे-धीरे मुझे दौड़ने में दिलचस्पी होने लगी और मैंने एक शौकिया धावक के तौर पर दौड़ना शुरू कर दिया। मेरे बचपन के दोस्त ने मेरे इवेंट्स में भाग लेने और उनसे जुड़े अपडेट्स देखे जिससे उसे भी दौड़ने में दिलचस्पी हुई।
हमने बारामुला और उसके आस-पास दौड़ना शुरू किया और समय के साथ धावकों का एक छोटा सा ग्रुप बन गया जो कभी-कभी हमारे साथ दौड़ने के लिए जुड़ते थे। एक दिन कॉफी पीते हुए हमने सोचा कि क्यों न बारामुला में झेलम नदी के किनारे पूर्णिमा की रात को ''नाइट रन'' का प्लान बनाया जाए। जब हमने इस पर काम करना शुरू किया तो हमने इसका नाम ''''ज़ून रन'''' रखा, लेकिन दुर्भाग्य से उस दिन बारिश हो गई और हमारा प्लान पूरा नहीं हो सका।
फिर हमने स्थानीय स्तर पर एक दौड़ आयोजित करने का प्लान बनाया और 2025 में इसका नाम ''ज़ून रन: स्पिरिट ऑफ बारामुला'' रखा जिसमें स्थानीय स्तर पर लगभग 150 प्रतिभागियों को इकट्ठा किया गया। इसी तरह हमने इस सालाना इवेंट की शुरुआत की।