अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। महीनों की भारी बर्फबारी और कड़ाके की सर्दी के बाद मौसम में सुधार होने लगा है इसलिए सेना ने उत्तरी कश्मीर के बांदीपोरा जिले की गुरेज घाटी में लाइन ऑफ कंट्रोल (एलओसी) के पास इजमर्ग गांव में खैरियत पेट्रोलिंग की। जवान घर-घर जाकर लोगों की खैर-खैरियत पूछ रहे हैं।
गुरेत घाटी में हाल ही में बहुत ज्यादा सर्दी पड़ने के बाद सेना के जवान मोटी बर्फ की चादर के बीच घर-घर जाकर स्थानीय लोगों से सीधे बातचीत करने लगे हैं। पेट्रोलिंग का मकसद गांव वालों का हालचाल जानना और इन दूर-दराज के बॉर्डर इलाकों में सर्दियों की बीच लोगों की स्थिति का जायजा लेना था जो सर्दियों के मौसम के दौरान महीनों तक कटे रहते हैं।
इस दौरे के दौरान सैनिकों ने जरूरी सामान की उपलब्धता, मेडिकल सुविधाओं तक पहुंच और दूसरी बुनियादी जरूरतों के बारे में पूछा। उन्होंने लंबे सर्दियों के महीनों में लोगों की शिकायतों को ध्यान से सुना और उन्हें भरोसा दिलाया कि उनकी चिंताओं को जल्द से जल्द दूर किया जाएगा। एक स्थानीय मोहम्मद सुल्तान ने कहा कि सेना बॉर्डर के पास रहने वाले लोगों की मुश्किलों को समझने के लिए लगभग हर हफ्ते नियमित खैरियत पेट्रोलिंग कर रही है। उन्होंने कहा कि इस पहल से उन गांव वालों को तसल्ली मिली है जो अक्सर अकेलेपन और खराब मौसम की वजह से परेशान रहते हैं।
उन्होंने आगे कहा कि भारी बर्फबारी के बावजूद सेना के जवान खुद उनके घरों तक आए और पतले और फिसलन भरे रास्तों से गुजरने के बाद उनका हालचाल पूछा। उनके मुताबिक इन दौरों से सेना और स्थानीय लोगों के बीच भरोसा और बातचीत मजबूत होती है। मोहम्मद सुल्तान ने सर्दियों के मौसम में दूर-दराज के बॉर्डर इलाकों में ऐसी पहल करने के लिए सेना को धन्यवाद दिया। वह ऐसे समय में उनतक पहुंचते हैं जब कनेक्टिविटी और बुनियादी सुविधाओं तक पहुंच बुरी तरह प्रभावित रहती है।
सेना का प्रयास, लोग खुद को अकेला महसूस न करें
खास बात यह है कि गुरेज-बांदीपोरा रोड हर सर्दियों में कम से कम तीन से चार महीने तक जिला हेडक्वार्टर से कटी रहती है क्योंकि इस इलाके में भारी बर्फबारी होती है। लंबे समय तक बंद रहने से रोजमर्रा की जिंदगी मुश्किल हो जाती है जिससे घाटी में ट्रांसपोर्ट, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच, सप्लाई चेन और इमरजेंसी सर्विस पर असर पड़ता है। खैरियत पेट्रोलिंग को एक बड़ी कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि बर्फ से ढके गांवों के लोग कड़ाके की सर्दी के महीनों में अकेला महसूस न करें और उन्हें जरूरी मदद और ध्यान मिलता रहे।