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Srinagar News: श्रद्धा व शांति के साथ संपन्न हुए आशूरा के ऐतिहासिक मातमी जुलूस

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श्रीनगर में यौमे आशूरा के मौके पर श्रद्धालु। संवाद - फोटो : संवाद
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- राजनेताओं ने करबला के शहीदों को दी भावभीनी श्रद्धांजलि
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- अकीदतमंदों ने जंजीरजनी और मर्सियाख्वानी कर इमाम हुसैन को किया याद
- उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री सहित विभिन्न नेताओं ने बलिदान को बताया मानवता का प्रेरणास्रोत

अमृतपाल सिंह बाली
श्रीनगर। मुहर्रम के पवित्र महीने की दसवीं तारीख यानी यौम-ए-आशूरा के भावुक अवसर पर पूरी घाटी में शिया समुदाय के लोगों ने ऐतिहासिक मातमी जुलूस निकाले। इसमें शामिल अकीदतमंदों ने हजरत इमाम हुसैन और करबला के अन्य शहीदों की शहादत को याद किया।
घाटी में मर्सियाख्वानी के साथ-साथ जंजीरजनी कर मातम मनाया गया। जहां एक तरफ जमीन पर अकीदतमंदों का हुजूम और स्थानीय लोगों की ओर से भाईचारे की मिसाल देखने को मिली, वहीं दूसरी तरफ जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल, मुख्यमंत्री और तमाम प्रमुख राजनीतिक दलों के नेताओं ने करबला के शहीदों को नमन करते हुए उनके सर्वोच्च बलिदान को पूरी मानवता के लिए सत्य, न्याय और मानवीय गरिमा का शाश्वत प्रकाश स्तंभ बताया।
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घाटी के विभिन्न हिस्सों की तरह श्रीनगर के जडिबल इलाके में स्थित मातम सराय में मातमी जुलूस पहुंचा। इसमें बड़ी संख्या में शिया समुदाय के लोग शामिल हुए। यह मुख्य जुलूस श्रीनगर के रैनावारी इलाके में स्थित हसनाबाद से शुरू हुआ था जो लाल बाजार, बोटकदल और आलमगीरी बाजार जैसे प्रमुख क्षेत्रों से होते हुए जडिबल पहुंचा। इस जुलूस के दौरान अकीदतमंदों ने मर्सिया पढ़ने के साथ ही भारी मातम मनाया और जुलूस में मौजूद जुल्जना को छूकर आशीर्वाद हासिल किया।
जिस रास्ते से भी यह मातमी कारवां गुजरा, वहां आपसी सौहार्द का एक खूबसूरत नजारा देखने को मिला। स्थानीय निवासियों ने जगह-जगह और थोड़ी-थोड़ी दूरी पर जलपान के स्टाल लगाए हुए थे ताकि लंबी दूरी तय कर रहे मातमगुजारों को किसी तरह की असुविधा न हो। इस पूरे आयोजन के दौरान जम्मू-कश्मीर पुलिस और नागरिक प्रशासन द्वारा सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए थे और पुराने शहर के संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त जवानों की तैनाती की गई थी, जिसके चलते पूरी घाटी में माहौल पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा। इस धार्मिक आयोजन के बीच जम्मू-कश्मीर के शीर्ष नेतृत्व ने भी इमाम हुसैन के संदेश को रेखांकित किया।
यह बलिदान समय की सीमाओं से परे है : उपराज्यपाल
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने अपने संदेश में कहा कि करबला के मैदान में दिया गया यह बलिदान समय की सीमाओं से परे है और समाज को इन सार्वभौमिक आदर्शों को अपनाकर एक न्यायसंगत समाज के निर्माण के लिए मिलकर काम करना चाहिए।
अन्याय के खिलाफ डटे रहने की सीख देता है इमाम हुसैन का जीवन : सीएम
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शहीदों को नमन करते हुए करबला की त्रासदी को अत्याचार के खिलाफ साहस और प्रतिरोध का अमर प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन का जीवन हर विपरीत परिस्थिति में इंसान को नैतिक मूल्यों की रक्षा करने और अन्याय के खिलाफ डटे रहने की सीख देता है।
जो सत्य पर अडिग रहते हैं, वे दिलों में अमर हो जाते हैं : डॉ. फारूक
इमाम हुसैन की विरासत को संपूर्ण मानव जाति की सामूहिक धरोहर बताते हुए नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि इतिहास गवाह है कि जो लोग सत्य और सिद्धांतों पर अडिग रहते हैं, वे लोगों के दिलों में हमेशा के लिए अमर हो जाते हैं, जबकि अत्याचारी सांसारिक जीत के बावजूद अपमान के भागी बनते हैं। उन्होंने इस मौके पर पूरे देश में सांप्रदायिक सौहार्द की प्रार्थना की।
अन्याय के सामने चुप रहना जमीर से विश्वासघात है : महबूबा
पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने करबला के महत्व को वैश्विक स्तर पर जोड़ते हुए कहा कि जहां कहीं भी लोग उत्पीड़न झेल रहे हैं, वहां करबला की भावना यह याद दिलाती है कि अन्याय के सामने चुप रहना अपने जमीर से विश्वासघात है। इसके साथ ही पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष सज्जाद गनी लोन और कश्मीर के मुख्य उपदेशक मीरवाइज उमर फारूक ने भी शहीदों को नमन करते हुए कहा कि दुनिया की भौतिक ताकतें एक दिन खत्म हो जाती हैं, लेकिन आस्था, बलिदान, धैर्य और नैतिक साहस हमेशा जीवित रहते हैं।

शांतिपूर्ण आयोजन के लिए आईजीपी ने जताया आभार

जम्मू कश्मीर पुलिस के कश्मीर जोन के पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) वीके बिरदी ने शुक्रवार को मुहर्रम के जुलूसों, विशेषकर जडीबल में उमड़े सबसे बड़े मातमी हुजूम के शांतिपूर्ण और सुरक्षित संचालन के लिए आम जनता और स्वयंसेवकों के सहयोग की जमकर सराहना की है। व्यवस्थाओं की समीक्षा करने जडीबल पहुंचे आईजीपी ने कहा कि पुराने शहर की तंग गलियों में भीड़ और सुचारु यातायात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने एक विशेष सुरक्षा व ट्रैफिक प्लान तैयार किया था ताकि लोग सुगमता से अपने घरों को लौट सकें।
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एक के बाद एक धार्मिक आयोजनों के कारण आने वाली व्यावहारिक दिक्कतों को स्वीकार करते हुए आईजीपी ने सुरक्षा ब्लूप्रिंट को जमीन पर उतारने के लिए स्थानीय आयोजकों और तैनात वालंटियरों को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि पुलिस प्रोटोकॉल का पालन कराने में जनता का विशेष सहयोग मिला, जिसके लिए विभाग उनका बेहद आभारी है।
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