- आदि शंकराचार्य संसार ...राष्ट्रीय कला वर्कशॉप शुरू, बडगाम स्थित सीआरपीएफ के 43वीं बटालियन मुख्यालय में हुआ आयोजन
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। आदि शंकराचार्य संसार शीर्षक से सात दिन की राष्ट्रीय कला वर्कशॉप वीरवार को बडगाम स्थित सीआरपीएफ के 43वीं बटालियन मुख्यालय में शुरू हुई। इसमें देश के सात जाने-माने राष्ट्रीय स्तर के कलाकार और युवा आर्ट स्टूडेंट एक साथ आएंगे ताकि आदि शंकराचार्य की आध्यात्मिक और ऐतिहासिक विरासत की रचनात्मक तरीके से खोज की जा सके।
यह वर्कशॉप मास्टर संसार चंद बारू मेमोरियल चैरिटेबल ट्रस्ट, इंदिरा गांधी नेशनल सेंटर फॉर द आर्ट्स और मिनिस्ट्री ऑफ कल्चर, केंद्र सरकार के साथ मिलकर आयोजित कर रहा है। यह वर्कशॉप 19 से 25 फरवरी तक चलेगी। वर्कशॉप की थीम 8वीं सदी के फिलॉस्फर और अद्वैत वेदांत के समर्थक आदि शंकराचार्य से जुड़ी अमीर आध्यात्मिक विरासत के आस-पास घूमती है।
माना जाता है कि कश्मीर की अपनी यात्रा के दौरान उन्होंने पहाड़ी पर बने मंदिर में ध्यान किया था जिसे अब शंकराचार्य मंदिर के नाम से जाना जाता है। इसे पहले गोपाद्री पहाड़ी कहा जाता था। श्रीनगर शहर और डल झील के पास मौजूद यह प्राचीन मंदिर कश्मीर की गहरी दार्शनिक और सांस्कृतिक परंपराओं का प्रतीक है। इतिहासकारों का मानना है कि आदि शंकराचार्य की यात्रा ने कश्मीर में सनातन दार्शनिक परंपराओं को फिर से जिंदा करने में अहम भूमिका निभाई जो उस समय सीखने का एक बड़ा केंद्र था। यह मंदिर जम्मू और कश्मीर की सबसे पवित्र आध्यात्मिक जगहों में से एक है।
इस वर्कशॉप में श्रीनगर से मोहम्मद इरफान भट, मोहम्मद सुहैल खान, उम्मेद नियाज रेशी, सैयद मुर्सलीन, सुहैब अहमद हकीम जैसे प्रतिभाशाली युवा कलाकार शामिल रहे। साथ ही दिल्ली से शर्मिला शर्मा और कोलकाता से अपूर्वा कराती भी शामिल हैं। सभी प्रतिभागी अच्छी तरह से पढ़े-लिखे आर्ट स्कॉलर हैं जिनमें जामिया और फाइन आर्ट्स में मास्टर प्रोग्राम के छात्र शामिल हैं। कलाकार शंकराचार्य मंदिर, कश्मीर के आध्यात्मिक नजारों और अद्वैत की दार्शनिक शिक्षाओं से प्रेरित होकर लाइव पेंटिंग बना रहे हैं जो विजुअल आर्ट के जरिए एकता, ज्ञान और अंदर की जागृति को दिखाते हैं।
कई मुश्किलों के बावजूद छात्रों का काम शानदार है : अनुराधा
इस मौके पर ट्रस्ट की प्रेसिडेंट अनुराधा ऋषि ने कहा, स्टूडेंट्स बहुत इंटेलिजेंट हैं और कई मुश्किलों के बावजूद उनका काम शानदार है। सीखने के प्रति उनका समर्पण सच में मेरे दिल को छू जाता है। मुझे बार-बार ऐसी वर्कशॉप ऑर्गनाइज करने के लिए खींचता है। मैं उनकी ईमानदारी और आर्टिस्टिक कमिटमेंट की तारीफ करती हूं। हिस्सा लेने वाले कई स्टूडेंट्स बहुत पढ़े-लिखे हैं और जामिया और दूसरे मास्टर प्रोग्राम जैसे जाने-माने इंस्टीट्यूशन से आते हैं।
सरकार को ऐसी वर्कशॉप को समर्थन देते रहना चाहिए
ट्रस्ट की अध्यक्ष ने कहा कि कला सबसे आसान भाषा है। यह सकारात्मकता फैलाती है और विचारों को सीमाओं से परे जोड़ती है। मेरा मानना है कि सरकार को ऐसी आर्ट वर्कशॉप को समर्थन और आशीर्वाद देते रहना चाहिए ताकि ज्यादा से ज्यादा युवाओं को क्रिएटिव तरीके से खुद को एक्सप्रेस करने का मौका मिले।