संवाद न्यूज एजेंसी
कुपवाड़ा। जिले के किसानों ने 13वीं सदी की ऐतिहासिक सिंचाई नहर के बंद पड़े होने पर गंभीर चिंता जताई है। लगभग 28 किलोमीटर लंबी इस नहर के बंद होने से किसान फसल की सिंचाई नहीं कर पा रहे।
स्थानीय लोगो के अनुसार यह नहर बुमहामा से तुज्जर शरीफ सोपोर तक फैली है। इसका संबंध लल्ला रैना से बताया जाता है। बाद में इसे सुल्तान जैन-उल-आबिदीन के शासनकाल में बहाल किया गया था। किसानों ने बताया कि यह नहर करीब एक लाख कनाल कृषि भूमि की सिंचाई का मुख्य स्रोत रही है। उन्होंने कहा, कृषि सीजन के चरम समय में भी सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण विभाग कुपवाड़ा और हंदवाड़ा नहर को चालू करने में विफल रहा है। इससे सिंचाई के पानी की भारी कमी हो गई है।
किसानों को फसलों के नुकसान का डर सता रहा है। उनका कहना है कि अगर जल्द कदम नहीं उठाए गए तो भारी आर्थिक नुकसान हो सकता है। किसानों ने प्रशासन के प्रति नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि बार-बार अपील के बावजूद जमीनी स्तर पर कोई कार्रवाई नजर नहीं आ रही है।
उन्होंने उपराज्यपाल, मुख्यमंत्री और कृषि मंत्री से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। किसानों ने कहा कि यह नहर इलाके की खेती की रीढ़ है। इसी पर सैकड़ों परिवारों की आजीविका निर्भर है। उन्होंने मांग की कि नहर में पानी छोड़ा जाए।