गीतांजलि ने एनएसए के तहत गिरफ्तारी को गलत बताया और कहा कि उनका पति शांति और अहिंसा का मार्ग अपनाते हुए सरकार से लद्दाख के लिए किए गए वादों को याद दिलाते रहे हैं। आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान हिंसा सीआरपीएफ द्वारा आंसू गैस चलाने के बाद भड़क उठी, जबकि वांगचुक को गैर-शांतिपूर्ण गतिविधियों की कोई जानकारी नहीं थी।
वांगचुक के कथित अपमानजनक भाषण के आरोपों को भी उन्होंने गलत बताया और कहा कि उनके शब्दों को गलत संदर्भ में पेश किया गया है। साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि जो व्यक्ति भारतीय सेना के लिए शेल्टर बनाने और चीनी सामान के बहिष्कार की बात करता है, उसे कैसे देशद्रोही ठहराया जा सकता है।
वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों पर गीतांजलि ने अपने संस्थान हिमालयन इंस्टिट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव लर्निंग की विदेश से मिली फंडिंग की स्पष्ट सफाई दी और कहा कि यह दान नहीं बल्कि तकनीकी सेवाओं के लिए भुगतान है। कहा कि संस्था द्वारा छात्रों से कोई फीस नहीं ली जाती और संचालन के खर्चे नवाचारों के जरिए जुटाए जाते हैं।
यूजीसी पंजीकरण की प्रक्रिया अभी भी लंबित है और भूमि आवंटन भी प्रशासन की दिक्कतों के कारण नहीं हो पाया है। स्पष्ट किया कि वांगचुक विकास के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि वे स्थानीय लोगों को निर्णय प्रक्रिया में शामिल करने वाले ‘माइंडफुल डेवलपमेंट’ की पैरवी करते हैं।
चार सितंबर की हिंसा के बाद केंद्र सरकार ने वांगचुक के द्वारा स्थापित एसईसीएमओएल का एफसीआरए लाइसेंस रद्द कर दिया था, जिसके बाद वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगे थे।