जैव विविधता संरक्षण की दिशा में भी प्रयास जारी हैं, जिनके तहत स्नो लेपर्ड और हिमालयन ब्राउन बेयर जैसी प्रजातियों की सुरक्षा के लिए काम कर रहे संगठनों को सहयोग दिया जा रहा है। इसके अलावा 'द ग्रेट हिमालयन एक्सप्लोरेशन' परियोजना के माध्यम से लद्दाख आने वाले राइडर्स को स्थानीय सांस्कृतिक परंपराओं का दस्तावेजीकरण करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे वैश्विक साझेदारों के साथ मिलकर विरासत संरक्षण में मदद मिल रही है।
आइस हॉकी लीग के बारे में डोलमा ने बताया कि यह पहल 'लर्न टू प्ले' जैसे छोटे जमीनी कार्यक्रमों से विकसित हुई है, जिसके तहत दूरदराज गांवों में बच्चों को स्केटिंग का प्रशिक्षण दिया जाता है। खिलाड़ियों के चयन की प्रक्रिया लद्दाख आइस हॉकी एसोसिएशन के माध्यम से क्षेत्रवार की जाती है, ताकि विभिन्न इलाकों के खिलाड़ियों को समान अवसर मिल सके।
उन्होंने दूरस्थ गांवों में प्रशिक्षण कार्यक्रम लागू करने की चुनौतियों को भी स्वीकार किया, जिनमें प्रशिक्षित कोचों की कमी और लॉजिस्टिक समस्याएं शामिल हैं। इन चुनौतियों से निपटने के लिए स्थानीय खिलाड़ियों को पेशेवर कोचिंग प्रशिक्षण दिया गया है और खेल व्यवस्था को मजबूत करने हेतु रेफरी प्रशिक्षण भी शुरू किया गया है।
हालांकि खिलाड़ियों के राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचने का आकलन करना अभी जल्दबाजी होगा, डोलमा ने पिछले तीन वर्षों में खिलाड़ियों की तकनीक और टीम प्रदर्शन में उल्लेखनीय सुधार की बात कही। ऑल-वेदर रिंक तैयार होने के साथ अब इसे सालभर प्रशिक्षण के लिए उपयोग में लाने की योजना है, जिसके लिए एसोसिएशन और केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन के साथ समन्वय किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि रॉयल इनफील्ड सोशल मिशन प्रतिभाओं को निखारने और अवसरों का विस्तार करने के लिए प्रतिबद्ध है तथा लद्दाख में आइस हॉकी को बढ़ावा देने के साथ-साथ व्यापक सामुदायिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।